हिमाचल में सरकारी आवासों के आबंटन की व्यवस्था फास्टैस्ट फिंगर फर्स्ट जैसी : हाईकोर्ट

 




शिमला, 21 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को सरकारी आवास देने की मौजूदा व्यवस्था पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा है कि कर्मचारियों से हर साल सरकारी आवास के लिए नए सिरे से आवेदन लेना और नई सूची तैयार करना तर्कसंगत नहीं लगता। यह व्यवस्था अब केवल ‘फास्टैस्ट फिंगर फर्स्ट’ जैसी बनकर रह गई है।

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने अमित कुमार ठाकुर की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। अदालत ने सामान्य प्रशासन विभाग को सरकारी आवासों के आबंटन की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव की ओर से दाखिल हलफनामे को अदालत के सामने रखा गया। इसे देखने के बाद हाईकोर्ट ने ‘हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आबंटन (सामान्य पूल) नियम, 1994’ के नियम 6 के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया।

इस नियम के तहत सरकारी कर्मचारियों को सरकारी आवास पाने के लिए हर साल दोबारा आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद नई सूची तैयार की जाती है। अदालत ने इस प्रक्रिया पर हैरानी जताते हुए कहा कि हर साल नई सूची बनाने का कोई स्पष्ट तर्क नजर नहीं आता।

हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि विभाग को एक स्थायी सूची तैयार करनी चाहिए। इस सूची में सरकारी आवास के लिए पात्र कर्मचारियों के नाम शामिल रहें। जब किसी कर्मचारी को आवास मिल जाए तो उसका नाम सूची से हटा दिया जाए। इसी तरह सेवानिवृत्ति या तबादले के कारण जो कर्मचारी आवास पाने के पात्र नहीं रह जाते हैं, उनके नाम भी सूची से हटा दिए जाएं।

अदालत ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से हर साल आवेदन लेने और नई सूची बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे सरकारी आवासों के आबंटन की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित हो सकती है।

मामले में याचिकाकर्ता अमित कुमार ठाकुर ने दावा किया है कि वह सेवा की अनिवार्यता के आधार पर ‘आउट-ऑफ-टर्न’ सरकारी आवास पाने के हकदार हैं। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि यदि याचिकाकर्ता वास्तव में इस आधार पर आवास पाने का हकदार है तो उसे सरकारी मकान देने में क्या अड़चन है।

याचिका में लोक सेवा आयोग के एक कर्मचारी को सरकारी आवास दिए जाने का मामला भी उठाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि आयोग के उसी कर्मचारी को पहले 15 अक्टूबर 2023 को सरकारी मकान आबंटित किया गया और इसके बाद 22 मई 2025 को दोबारा आवास आबंटित किया गया।

हाईकोर्ट ने इस आरोप पर भी सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अदालत यह देखना चाहती है कि एक ही कर्मचारी को दो अलग-अलग मौकों पर सरकारी आवास आबंटित करने का आधार क्या था और इसके लिए नियमों का पालन किस तरह किया गया।

मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा