आईआईटी मंडी में वैश्विक जलवायु सम्मेलन में वैज्ञानिक प्रगति को गांवाें कस्बों में पहुंचाने का आह्वान
मंडी, 25 जून (हि.स.)। आईआईटी मंडी में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय जलवायु एवं आपदा-रोधी हिमालय सम्मेलन का आयोजन किया गया। जलवायु परिवर्तन एवं आपदा प्रबंधन केंद्र द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में दुनिया भर के प्रमुख वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस अवसर पर हिमालयी क्षेत्र के सामने बढ़ती जलवायु और आपदा संबंधी चुनौतियों पर मंथन किया। तीन दिनों तक चले तकनीकी सत्रों में आपदा प्रबंधन से जुड़े कई विषयों पर चर्चा की गई। जिसमें बहु-आपदा जोखिम आकलन, जलवायु पूर्वानुमान, जल एवं हिमनदी संबंधी चरम घटनाएं, भूकंप एवं अवसंरचना की मजबूती, प्रारंभिक चेतावनी और पूर्वानुमान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग के उपयोग आदि विषय शामिल रहे। सम्मेलन में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की भागीदारी रही।
पूर्ण अधिवेशन व्याख्यानों में जॉर्जिया प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रोफेसर जे. डेविड फ्रॉस्ट तथा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, मर्सिड के प्रोफेसर सफीक खान शामिल रहे। इसके अलावा इम्पीरियल कॉलेज लंदन, मिशिगन स्टेट विश्वविद्यालय, विभिन्न आईआईटी, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र तथा केंद्र सरकार की विभिन्न संस्थाओं के विशेषज्ञों ने भी अपने विचार साझा किए।
हिमालय विश्व के सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील और आपदा-प्रवण क्षेत्रों में गिना जाता है। बाढ़, बादल फटना, हिमनदीय झील विस्फोट से आने वाली बाढ़, भूस्खलन और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं यहां के पर्वतीय समुदायों के लिए लगातार गंभीर खतरा बन रही हैं। हिमालय की गोद में आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य अत्याधुनिक वैज्ञानिक शोध को जमीनी स्तर की नीतियों और इंजीनियरिंग समाधानों से जोड़कर क्षेत्र की दीर्घकालिक सुरक्षा और लचीलापन सुनिश्चित करना था।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा