हिमाचल प्रदेश के जंगल धधके, 43 दिनों में 258 आग की घटनाएं, हजारों हेक्टेयर वन भूमि राख

 




शिमला, 29 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ इन दिनों सिर्फ गर्मी से नहीं तप रहे, जंगलों में भड़कती आग से भी झुलस रहे हैं। देवदार और चीड़ के जंगलों से उठता धुआं अब कई इलाकों में रोज़ का दृश्य बन चुका है। हिल स्टेशन शिमला से लेकर मंडी, नाहन, धर्मशाला और कसौली तक जंगलों में आग ने ऐसा कहर बरपाया है कि कई जगहों पर हालात संभालने के लिए सेना तक को मोर्चा संभालना पड़ा।

राज्य में 15 अप्रैल से शुरू हुए वन अग्निकांड सीजन के सिर्फ 43 दिनों में जंगलों में आग लगने की 258 घटनाएं सामने आई हैं। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या करीब 111 थी। यानी इस बार आग की घटनाएं दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी हैं। आग से अब तक करीब 3310 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित हुई है। इसमें 2830 हेक्टेयर से ज्यादा प्राकृतिक वन क्षेत्र शामिल है। विभाग ने लगभग 81 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया है।

कसौली के जंगलों में ‘आग का पहाड़’

हाल ही में सोलन जिला के पर्यटन स्थल कसौली क्षेत्र के जंगलों में लगी भीषण आग ने प्रशासन और वन विभाग की सबसे बड़ी परीक्षा ली। तेज हवाओं और सूखी वनस्पति के कारण आग तेजी से फैलती चली गई और कई हेक्टेयर वन भूमि इसकी चपेट में आ गई। हालात इतने गंभीर हो गए कि सेना की मदद लेनी पड़ी। आग पर काबू पाने के लिए हेलीकॉप्टर के जरिए आसमान से पानी बरसाया गया।

सोलन में जंगलों की आग का असर कालका-शिमला रेललाइन पर भी देखने को मिला। सनवारा के पास रेलवे ट्रैक के आसपास आग फैलने के कारण दो ट्रेनों को करीब ढाई घंटे तक रोकना पड़ा। वहीं कोटखाई में जंगल की आग से काली माता मंदिर जलकर राख हो गया।

मंडी और धर्मशाला सबसे ज्यादा प्रभावित

वन विभाग के मुताबिक सबसे ज्यादा 83 मामले मंडी वन सर्कल में सामने आए हैं। इसके बाद धर्मशाला में 59 और नाहन में 52 घटनाएं दर्ज हुई हैं। शिमला, सोलन, हमीरपुर और चंबा जैसे क्षेत्रों में भी लगातार जंगल जल रहे हैं। राजधानी शिमला के कच्ची घाटी, झंझीडी और टूटीकंडी क्षेत्रों में बीते दिनों आग लगी, जबकि ओल्ड बैरियर के पास आग मनोरोग अस्पताल के गेट तक पहुंच गई थी। दमकल और वन विभाग की टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग को अस्पताल तक पहुंचने से रोका।

मार्च-अप्रैल में 592 आगजनी की घटनाएं

अग्निशमन विभाग के अनुसार मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान प्रदेश में आग लगने की कुल 592 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें जंगलों में लगी आग के 384 मामले शामिल हैं। इन घटनाओं में करीब 7.13 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ, हालांकि राहत और बचाव कार्यों के जरिए अरबों रुपये की संपत्ति बचाने का दावा भी किया गया है।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी संजीव कुमार के मुताबिक मार्च में 286 और अप्रैल में 306 आगजनी की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने कहा कि दमकल विभाग ने समय रहते कार्रवाई करते हुए कई लोगों और पशुओं की जान बचाई। मार्च में 13 लोगों और अप्रैल में 71 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।

वन विभाग और प्रशासन ने लोगों से जंगलों और खुले क्षेत्रों में आग न जलाने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि जलती बीड़ी-सिगरेट या छोटी चिंगारी भी बड़े अग्निकांड का कारण बन सकती है। लोगों से किसी भी आग की घटना की तुरंत सूचना प्रशासन और दमकल विभाग को देने को कहा गया है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश का लगभग 30 से 40 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है। राज्य का कुल भौगोलिक क्षेत्र 55,673 वर्ग किलोमीटर है, जबकि मुख्य वन क्षेत्र करीब 15,433 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। हर साल गर्मियों में जंगलों में आग लगती है, लेकिन इस बार बढ़ती गर्मी, सूखी हवाओं और लंबे शुष्क मौसम ने खतरे को और बढ़ा दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा