ईपीएफओ वेतन सीमा बढ़ने से 18 से 24 हजार रुपये वेतन वाले मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा: बीएमएस

 

शिमला, 16 सितंबर (हि.स.)। केंद्र सरकार की ओर से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की अनिवार्य सदस्यता के लिए मासिक वेतन सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किए जाने के फैसले का भारतीय मजदूर संघ हिमाचल प्रदेश ने स्वागत किया है। संघ ने कहा है कि इस बदलाव से हिमाचल के औद्योगिक क्षेत्रों में 18 से 24 हजार रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले बड़ी संख्या में कर्मचारी कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना और बीमा सुरक्षा के दायरे में आ सकेंगे। केंद्र सरकार के अनुसार वेतन सीमा बढ़ने से देशभर में करीब 51 लाख अतिरिक्त कर्मचारी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के दायरे में आएंगे। नई व्यवस्था 17 सितंबर 2026 से लागू होगी।

भारतीय मजदूर संघ के अनुसार बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़, परवाणू, कालाअंब, पांवटा साहिब, मैहतपुर, टाहलीवाल, गगरेट और पंडोगा सहित प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और सीमेंट उद्योग में ऐसे कई कर्मचारी हैं, जिनका मासिक वेतन 15 हजार रुपये से अधिक होने के कारण अब तक अनिवार्य भविष्य निधि के दायरे से बाहर था। संघ का कहना है कि नई सीमा लागू होने से इन कर्मचारियों को भविष्य निधि में बचत, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा, महामंत्री यशपाल हेटा और उपमहामंत्री देवीदत्त तनवर ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वेतन सीमा बढ़ाना मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

12 साल बाद बढ़ी वेतन सीमा

कर्मचारी भविष्य निधि की अनिवार्य सदस्यता के लिए वेतन सीमा में करीब 12 साल बाद बदलाव किया गया है। सितंबर 2014 में इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये किया गया था। इसके बाद इसमें बदलाव नहीं हुआ था। अब इसे 25 हजार रुपये किए जाने से 15 से 25 हजार रुपये मासिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज का दायरा बढ़ेगा। केंद्र सरकार के अनुसार, इस विस्तार पर सरकार का सालाना खर्च करीब 11,339 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा