रोहित ठाकुर ने ‘एचपी फ्यूचर्स’ परियोजना की समीक्षा की, 12 पीएम श्री विद्यालयों से शुरू होंगे शिक्षा सुधार
शिमला, 26 फ़रवरी (हि.स.)। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने वीरवार को समग्र शिक्षा के अंतर्गत आयोजित यूनेस्को समर्थित एचपी फ्यूचर्स परियोजना की संचालन समिति की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में परियोजना की प्रगति की समीक्षा की गई तथा शिक्षा सुधारों के अगले चरण के लिए कार्ययोजना निर्धारित की गई। शिक्षा मंत्री ने कहा कि यूनेस्को के साथ हुआ समझौता राज्य सरकार की गुणवत्तापूर्ण और विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक कठिनाइयों और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों के बावजूद सरकार दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक शहरी क्षेत्रों के समान प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए प्रयासरत है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में आरंभ की गई एचपी फ्यूचर्स परियोजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय करिकुलम फ्रेमवर्क-2023 के अनुरूप तैयार की गई है। परियोजना का उद्देश्य समावेशी और जलवायु-संवेदनशील पीएम श्री तथा अन्य विद्यालयों का विकास करना है।
परियोजना कौशल आधारित शिक्षा, खेलों के माध्यम से नैतिक मूल्य शिक्षा और हरित शिक्षा जैसे तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इसका लक्ष्य विद्यार्थियों में सृजनात्मक सोच, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीमवर्क तथा पर्यावरण के प्रति जागरूकता विकसित करना है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि सितंबर 2025 में आयोजित पहली बैठक के बाद नागरिक समाज संगठनों, समग्र शिक्षा, एससीईआरटी और डाइट के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया है। लगभग 200 शिक्षकों, जिनमें वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों के शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता शामिल हैं, को खेलों के माध्यम से नैतिक शिक्षा का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही ईको-क्लबों को सशक्त किया गया है और विद्यार्थियों की पर्यावरणीय गतिविधियों में सहभागिता बढ़ी है।
रोहित ठाकुर ने कहा कि सुधारों की शुरुआत 12 पीएम श्री विद्यालयों से की जाएगी। इसके बाद इसे 99 विद्यालयों तक विस्तारित किया जाएगा और अंततः पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। उन्होंने डाइट के माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षण को और मजबूत करने, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड, एससीईआरटी और डाइट के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर बल दिया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यूनेस्को की सिफारिशें केवल रिपोर्ट तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षण, सीखने के परिणामों और विद्यालयों की कार्यप्रणाली में ठोस सुधार के रूप में परिलक्षित हों। शिक्षा मंत्री ने सिफारिशों के समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश भी दिए।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यूनेस्को के सहयोग से हिमाचल प्रदेश शिक्षा क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में उभरेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला