क्रिप्टोकरेंसी के नाम पर 500 करोड़ की ठगी, शिमला ईडी ने चंडीगढ़-मोहाली में मारे छापे, 72 लाख रुपये नकद जब्त
शिमला, 02 नवंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश और पंजाब के हजारों निवेशकों से क्रिप्टोकरेंसी में ऊंचे मुनाफे का लालच देकर करीब 500 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के शिमला सब-जोनल कार्यालय की टीम ने चंडीगढ़, मोहाली और जीरकपुर में कई ठिकानों पर छापेमारी कर 72 लाख रुपये नकद जब्त किए हैं। इस कार्रवाई में मामले के मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा के करीबी अतुल सूद को गिरफ्तार किया गया है। उसे शिमला स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 5 नवंबर तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया। ईडी के एक प्रवक्ता ने सोमवार को यह जानकारी दी।
ईडी के अनुसार छापेमारी के दौरान संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज कई डिजिटल उपकरण और बैंक खातों से संबंधित रिकॉर्ड भी जब्त किए गए हैं। जांच में सामने आया है कि अतुल सूद सुभाष शर्मा का करीबी सहयोगी था। वह दुबई जाकर सुभाष शर्मा से मिला था और उसके लिए सम्मेलन तथा दूसरे कार्यक्रम आयोजित करने में शामिल था। यह गतिविधियां धोखाधड़ी की योजना के संबंध में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी जारी रहीं। ईडी ने यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 17(1) के तहत की है।
ढाई लाख से अधिक यूजर बने निवेश योजना के शिकार
ईडी की जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब पुलिस की ओर से सुभाष शर्मा और उसके सहयोगियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोरवियो कॉइन (केआरओ) के नाम पर मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) योजना चलाई। इसमें निवेशकों को ऊंचे और निश्चित रिटर्न का भरोसा देकर पैसा लगाया गया। यह योजना पोंजी मॉडल पर काम कर रही थी। इसमें नए निवेशकों से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता था। ईडी को मिले डिजिटल रिकॉर्ड के अनुसार इस योजना से 2.48 लाख से अधिक यूजर प्रभावित हुए। इसमें 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक के लेनदेन हुए और निवेशकों को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
निवेशकों से नकदी लेकर आरोपियों तक पहुंचाया गया पैसा
जांच में यह भी सामने आया कि नए निवेशकों से जुटाई गई अधिकांश रकम नकद के रूप में ली जाती थी। अलग-अलग टीमों के प्रमुखों के माध्यम से यह पैसा आगे पहुंचाया जाता था और अंत में सुभाष शर्मा तथा उसके सहयोगियों तक जाता था। इनमें विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा के नाम भी सामने आए हैं। ईडी के मुताबिक निवेशकों से जुटाई गई रकम का एक हिस्सा अचल संपत्तियां खरीदने में लगाया गया। इन संपत्तियों के वास्तविक सौदे की रकम और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कीमत के बीच काफी अंतर था। बड़ी रकम का भुगतान नकद में किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
इसके अलावा निवेशकों से मिली रकम का एक छोटा हिस्सा कई बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और बिचौलियों के माध्यम से आगे भेजा गया। इस धन का कुछ हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी में भी बदला गया, जिससे रकम के असली स्रोत और उसके लेनदेन का पता लगाना मुश्किल हो सके। ईडी इस पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, सुभाष शर्मा दुबई में
इस मामले में ईडी इससे पहले 13 दिसंबर 2025 और 15 जून 2026 को भी छापेमारी कर चुकी है। उस दौरान योजना से जुड़े कई लोगों के ठिकानों से आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। इसके साथ करीब 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की चल संपत्तियां भी जब्त की गई थीं। ईडी ने इस मामले में सुभाष शर्मा के सहयोगियों हेमराज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा, मिलन गर्ग और मासूम जुनेजा को गिरफ्तार किया था। इनके खिलाफ शिमला की विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत और पूरक अभियोजन शिकायत भी दाखिल की जा चुकी है।
ईडी के अनुसार इस क्रिप्टोकरेंसी घोटाले का मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा हजारों निवेशकों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के बाद दुबई चला गया था। उसके खिलाफ सक्षम प्राधिकरणों के समक्ष कानूनी कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। मामले में धन के लेनदेन, संपत्तियों की खरीद और अन्य सहयोगियों की भूमिका को लेकर आगे की जांच जारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा