ड्रैगन फ्रूट की बागवानी से संवर रही भरनाल के किसानों की आर्थिकी
मंडी, 29 अक्टूबर (हि.स.)। मंडी जिला के उपमंडल सरकाघाट में भरनाल गांव के प्रगतिशील बागवान रूप लाल और टेक चंद ने पारंपरिक खेती के बजाय ड्रैगन फ्रूट की बागवानी शुरू कर स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में सराहनीय पहल की है। दोनों ने दो-दो बीघा जमीन पर ड्रैगन फ्रूट के बगीचे स्थापित किए हैं। रूप लाल को पहली व्यावसायिक पैदावार से करीब दो लाख रुपये की आमदनी हुई है।
रूप लाल बताते हैं कि वर्ष 2023 में उन्हें बागवानी विभाग सरकाघाट के माध्यम से ड्रैगन फ्रूट की खेती की संभावनाओं के बारे में जानकारी मिली। गोपालपुर स्थित पंजीकृत ड्रैगन फ्रूट नर्सरी से जंबो-रेड फ्लेश किस्म (लाल गुद्दा) के लगभग 400 पौधे खरीदकर लगाए। पौधों को सहारा देने के लिए उन्होंने आरसीसी रिंग पोल सपोर्टेड तकनीक अपनाई।
बगीचे की स्थापना के लिए उन्हें सरकार की ओर से बागवानी विभाग के माध्यम से कुल स्थापना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान भी मिला।
उन्होंने पौधों की देखभाल में प्राकृतिक और जैविक विधियों को प्राथमिकता दी तथा रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल किए बिना बेहतर उत्पादन प्राप्त करने का प्रयास किया।
बगीचा स्थापित करने के तीसरे वर्ष उन्हें पहली बार ड्रैगन फ्रूट की पैदावार मिली। एक सीजन में अब तक पांच से छह बार फल तुड़ाई कर चुके हैं और बाजार में लगभग 180 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से फल बेच रहे हैं। पहली व्यावसायिक पैदावार के सीजन में उन्हें अपनी दो बीघा जमीन से करीब दो लाख रुपए की आमदनी हुई है। आने वाले समय में उत्पादन बढ़ने के साथ आमदनी में भी वृद्धि की संभावना है।
रूप लाल ने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बागवानों की आय बढ़ाने की दिशा में सरकार और विभाग के प्रयास किसानों को नई संभावनाएं तलाशने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
भरनाल के ही प्रगतिशील बागवान टेकचंद ने भी पारंपरिक फसलों के बजाय ड्रैगन फ्रूट की खेती अपनायी है। उन्होंने दो बीघा जमीन पर बगीचा स्थापित किया जिसके लिए स्थापना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ है। उनका कहना है कि कम लाभ देने वाली पारंपरिक फसलों के स्थान पर बागवानी से आय बढ़ाने की दिशा में किसान बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने बागवानी को प्रोत्साहन देने के लिए प्रदेश सरकार का आभार भी व्यक्त किया।
उद्यान विकास अधिकारी, सरकाघाट शबनम राणा ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का पौधा है, जिसे अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता होती है। गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में इसकी खेती की अच्छी संभावनाएं हैं। ढलानदार खेतों में आवश्यक भूमि सुधार और समतलीकरण के बाद इसकी खेती की जा सकती है।
उचित देखभाल और प्रबंधन के साथ ड्रैगन फ्रूट के पौधों से लगभग 17 से 20 वर्षों तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा