औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में भाग लिया

 


मंडी, 12 अक्टूबर (हि.स.)। डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, थुनाग स्थित गोहर (गुडाहरी) के विद्यार्थियों ने जैव विविधता पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला में भाग लिया। औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, थुनाग के इन 17 विद्यार्थियों ने डॉ. सुनील मारपा के नेतृत्व में राजकीय महाविद्यालय कुल्लू में आयोजित तीन दिवसीय विज्ञान अकादमी व्याख्यान कार्यशाला में भाग लिया।

राजकीय महाविद्यालय कुल्लू के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा भारतीय विज्ञान अकादमियों के प्रायोजन में आयोजित यह कार्यशाला 7 से 9 अक्टूबर तक आयोजित की गई। इसका विषय सतत पर्यावरण के लिए जैव विविधता था। कार्यशाला के दौरान देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से आए वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने कुल 13 व्याख्यान प्रस्तुत किए। इनमें जैव विविधता का वैश्विक वितरण, भारतीय हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता, कृषि-जैव विविधता, स्वदेशी पहाड़ी फसलें, पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन, पर्यावरणीय कानून, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण तथा हिमालयी जैव संसाधनों के सतत उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

डॉ. सुनील मारपा ने आज यहां बताया कि विद्यार्थियों के लिए यह कार्यशाला विशेष रूप से उपयोगी रही। उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्रों में पारंपरिक फसलों, स्थानीय फल प्रजातियों, औषधीय पौधों और आनुवांशिक संसाधनों का संरक्षण कृषि की दीर्घकालिक उत्पादकता तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। जलवायु परिवर्तन के अनुरूप फसल विविधता को समझना, स्थानीय पौधों की प्रजातियों का संरक्षण करना और आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करना टिकाऊ कृषि प्रणालियों के विकास के लिए आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि कार्यशाला में प्राप्त जानकारी विद्यार्थियों को भविष्य में जलवायु-अनुकूल खेती, पादप संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, स्थानीय फसलों के संरक्षण, अनुसंधान और पर्यावरणीय प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने में सहायक होगी। विशेषज्ञों के व्याख्यानों ने उन्हें अपने पाठ्यक्रम के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक एवं अनुसंधानपरक दृष्टिकोण से जोड़ने का अवसर प्रदान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा