मंडी की डा.तारा सेन ने हिमाचल के जंगली पौधों व फलों पर श्रीलंका दिया व्याख्यान
मंडी, 24 अक्टूबर (हि.स.)। वल्लभ राजकीय महाविद्यालय मंडी में वनस्पति विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. तारा देवी सेन ने श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित 7वें विश्व पर्यावरण शिखर सम्मेलन में आमंत्रित व्याख्यान प्रस्तुत किया। सम्मेलन में 18 देशों के 350 प्रतिनिधि ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से भाग ले रहे हैं। डॉ. सेन ने पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान से प्रकृति-आधारित जल सुरक्षाः जल संरक्षण, जल गुणवत्ता में सुधार और जलग्रहण क्षेत्र के पुनर्स्थापन में हिमालयी पौधों की भूमिका विषय पर अपना शोधकार्य प्रस्तुत किया। उनके व्याख्यान में हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान, पौध विविधता और जल संरक्षण के बीच संबंधों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया गया।
उन्होंने बताया कि अध्ययन के दौरान 100 सूचनादाताओं के साथ संवाद, क्षेत्रीय अवलोकनों और वैज्ञानिक साहित्य के आधार पर 18 वनस्पति कुलों से संबंधित 24 पौध टैक्सा का दस्तावेजीकरण किया गया। डॉ. सेन के व्याख्यान और उनके शोधकार्य की सम्मेलन में उपस्थित प्रतिनिधियों ने सराहना की। उनका अध्ययन इस बात को रेखांकित करता है कि हिमालयी पौधे जैव विविधता के महत्वपूर्ण घटक होने के साथ-साथ मिट्टी और पानी के संरक्षण तथा दीर्घकालिक जल सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यह शोध जलवायु परिवर्तन, जल संकट और पारिस्थितिक क्षरण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की आवश्यकता को सामने लाता है।
गौरतलब है कि डॉ. सेन पिछले 18 वर्षों से अधिक समय से हिमालयी जंगली खाद्य पौधों, पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनका यह आमंत्रित व्याख्यान मंडी जिले में किए जा रहे शोध कार्य को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने तथा हिमालयी पर्यावरण संरक्षण के महत्व को वैश्विक स्तर पर रेखांकित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा