कश्मीर में धूमधाम से मनाई गई दिवाली, लाल चौक, पर्यटन स्थलों और सेना के कैंपों में बिखरी रोशनी
श्रीनगर, 08 नवंबर (हि.स.)। रविवार को कश्मीर घाटी में रोशनी का त्योहार 'दिवाली' बहुत धूमधाम से मनाया गया। कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों, काम और पढ़ाई के सिलसिले में घाटी में रह रहे अन्य राज्यों के लोगों और बड़ी संख्या में पर्यटकों ने अपने घरों और ठहरने की जगहों पर विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे बाजारों और पर्यटन स्थलों की ओर निकल पड़े। जश्न की शुरुआत एक रात पहले ही हो गई थी। कल रात ऐतिहासिक लाल चौक पर स्थानीय लोगों और पर्यटकों की भारी भीड़ देखी गई जहाँ लोग एक-दूसरे को दिवाली की बधाई दे रहे थे। त्योहार के लिए इलाके की कई इमारतों को रोशनी से सजाया गया था।
जम्मू-कश्मीर बैंक के मुख्यालय सहित कई सरकारी इमारतों को भी रोशन किया गया था। दिवाली के मौके पर श्रीनगर, खासकर लाल चौक में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। रात के समय अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया था ताकि त्योहार के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो।
रविवार को पर्यटकों ने डल झील, उसके किनारे स्थित मुगल गार्डन और श्रीनगर में हाल ही में खुले गुलदाउदी (क्रिसेंथेमम) गार्डन का दौरा किया। हर रविवार को लगने वाले मशहूर 'संडे मार्केट' में भी सामान्य दिनों की तुलना में कहीं ज्यादा भीड़ देखी गई। पर्यटन स्थलों पर स्थानीय लोग बाहर से आए पर्यटकों को दिवाली की बधाई देते नजर आए। सुहावने मौसम और धूप ने पर्यटकों के आनंद को और बढ़ा दिया और कई लोग तस्वीरें लेते हुए देखे गए। कई मंदिरों में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।
अमीरा कदल के पास स्थित हनुमान मंदिर सहित कई मंदिरों को रोशनी से सजाया गया था। पिछले वर्षों की तरह इस बार भी शहर की कुछ जगहों, जैसे रीगल चौक पर दिवाली का सामान बेचने के लिए स्टॉल लगाए गए थे। घाटी में तैनात सेना के जवानों ने भी अपने कैंपों में दिवाली मनाई। उन्होंने एक-दूसरे को बधाई दी और अपने साथी सैनिकों के बीच मिठाइयां बांटीं।
पर्यटकों के एक समूह ने कहा कि यह बहुत खुशी का मौका है। यह दिन कश्मीर और हम सभी के लिए खुशियां लेकर आए, हमें एक-दूसरे के करीब लाए और हमें मिल-जुलकर रहने में मदद करे। सभी का स्वास्थ्य अच्छा रहे और आर्थिक स्थिति बेहतर हो।
एक महिला पर्यटक ने कहा, “कश्मीर में दिवाली मनाना बहुत खुशी की बात है क्योंकि हम इसे पहाड़ों के बीच मना रहे हैं। हम प्रार्थना करते हैं कि सभी के चेहरे पर मुस्कान बनी रहे और हर घर में दिवाली का दीया जलता रहे।
उन्होंने कहा कि यह त्योहार परिवारों को एक साथ समय बिताने का मौका देता है। उन्होंने लोगों से स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि दूसरे देशों में बने दीयों के बजाय स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए दीयों का इस्तेमाल करें।
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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता