डीआईजी संजीव गांधी के खिलाफ दो मामलों की जांच अब एसआईटी के हवाले, वित्तीय रिकॉर्ड खंगालेगी टीम
शिमला, 25 अक्टूबर (हि.स.)। शिमला के पूर्व एसएसपी और डीआईजी संजीव कुमार गांधी के खिलाफ सरकारी धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े दो मामलों में अब जांच का दायरा वित्तीय रिकॉर्ड, दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल तक पहुंचेगा। शिमला के एसएसपी गौरव सिंह ने दोनों मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है। टीम को यह पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई है कि सरकारी धन किन मदों में खर्च हुआ, खर्च के लिए जरूरी मंजूरियां थीं या नहीं और इन मामलों में किन लोगों की भूमिका रही।
एसआईटी का गठन ऐसे समय हुआ है, जब एक मामले में पुलिस भवनों और जवानों के सरकारी आवासों की मरम्मत के बजट से 14.07 लाख रुपये शिमला स्थित तत्कालीन एसएसपी के सरकारी आवास पर खर्च किए जाने का आरोप है। दूसरे मामले में पुलिस लाइन कैथू में तैनात कांस्टेबल के 1.87 लाख रुपये के स्वीकृत बिलों का भुगतान नहीं होने और पुलिस फंड से 2.35 लाख रुपये की कथित अनियमित निकासी की जांच हो रही है।
एसआईटी की निगरानी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) मेहर पंवार करेंगी। टीम में सदर थाना शिमला के एसएचओ विवेक गौतम, बालूगंज थाना के एसएचओ अंकुश ठाकुर और स्पेशल सेल के सब-इंस्पेक्टर अंबी लाल शामिल हैं। आधिकारिक आदेश के अनुसार टीम सभी संबंधित दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। उसे प्रत्येक संबंधित व्यक्ति की भूमिका का पता लगाने, समय पर जांच पूरी करने और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को नियमित प्रगति रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
एसआईटी अब संजीव गांधी को जांच में शामिल होने के लिए भी तलब करेगी। दोनों मामलों में से एक पुलिस मुख्यालय की ऑडिट समिति की रिपोर्ट पर दर्ज किया गया है। समिति ने वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान पुलिस भवनों और जवानों के सरकारी आवासों की मरम्मत तथा रखरखाव के लिए आवंटित करीब 1.28 करोड़ रुपये के खर्च की जांच की थी। रिपोर्ट में एसएसपी शिमला रहते संजीव गांधी द्वारा शिमला स्थित सरकारी आवास 'साउथवुड' पर 14,07,392 रुपये खर्च किए जाने का रिकॉर्ड मिलने का उल्लेख है। समिति को इस खर्च के लिए अलग बजट की मंजूरी और जरूरी पूर्व स्वीकृतियों से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले।
रिपोर्ट के अनुसार रामपुर के एसडीपीओ आवास की मरम्मत के लिए स्वीकृत 2.80 लाख रुपये और शोघी पुलिस बैरियर की गुमटी की मरम्मत के लिए निर्धारित 2.50 लाख रुपये भी साउथवुड पर खर्च दर्शाए गए। समिति को शोघी में मरम्मत कार्य पूरा होने के प्रमाण नहीं मिले। वर्ष 2023-24 और 2024-25 के खर्चों से संबंधित मंजूरी तथा अनुशंसा के दस्तावेजों की उपलब्धता पर भी सवाल उठे हैं। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) के तहत एफआईआर दर्ज है।
दूसरा मामला पुलिस लाइन कैथू में तैनात एक कांस्टेबल की शिकायत से जुड़ा है। कांस्टेबल ने आरोप लगाया था कि उसने वर्ष 2024 और 2025 में सरकारी कामकाज पर अपनी जेब से 1,87,890 रुपये खर्च किए थे। बिल जमा कराने और भुगतान मंजूर होने के बाद भी उसे रकम नहीं मिली। शिकायत के अनुसार, 6 फरवरी 2026 को उससे भुगतान संबंधी वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। बाद में वित्तीय रिकॉर्ड की जांच में पुलिस फंड से करीब दो वर्षों के दौरान 2.35 लाख रुपये की कथित अनियमित निकासी का मामला सामने आया। इस एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5), 314, 318, 336 और 340 लगाई गई हैं।
इस बीच, संजीव गांधी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस विभाग में कथित गड़बड़ियों को उजागर करने के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि ट्रैफिक, टूरिज्म एंड रेलवे (टीटीआर) विभाग में उपकरणों की खरीद में अनियमितताएं हुई थीं और डीआईजी रहते हुए उन्होंने इसका ऑडिट कराने को कहा था, लेकिन इसकी अनुमति नहीं दी गई।
गौरतलब है कि संजीव गांधी 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और 23 जनवरी 2023 से 6 फरवरी 2026 तक शिमला के एसएसपी रहे। जनवरी 2026 में डीआईजी पद पर पदोन्नति के बाद उन्होंने विभिन्न पदों पर सेवाएं दीं। बाद में उन्हें हिमाचल प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम कांगड़ा का प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा