ऐतिहासिक नंदपुर किले, गुलेर को गोद लेगा केंद्रीय विश्वविद्यालय : कुलपति

 

धर्मशाला, 21 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय ने विश्व पर्यटन सप्ताह समारोह की शुरुआत कांगड़ा जिला के ऐतिहासिक नंदपुर किला, गुलेर में आयोजित शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संगोष्ठी चरैवेति 2026-गुलेर के साथ की। विश्वविद्यालय के पर्यटन, यात्रा एवं आतिथ्य प्रबंधन स्कूल और दृश्य कला विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह सप्ताह भर चलने वाला उत्सव एक स्पष्ट संकल्प के साथ शुरू हुआ। यह समारोह कुलपति प्रो. (डॉ.) सत प्रकाश बंसल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।

कुलपति प्रो. बंसल ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय पर्यटन, यात्रा एवं आतिथ्य प्रबंधन स्कूल और दृश्य कला विभाग के प्रयासों से नंदपुर किले को गोद लेगा। उन्होंने कहा कि इस किले के संरक्षण, जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास के लिए विश्वविद्यालय निरंतर कार्य करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालयों को कक्षाओं से बाहर निकलकर स्थानीय विरासत का संरक्षक बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह किला सिर्फ पत्थरों का ढेर नहीं है, यह एक कहानी है। अगर हम इसकी कहानी को पुनर्जीवित कर सकते हैं, तो पर्यटन स्वतः ही आएगा।

इस संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), शिमला की निदेशक प्रो. शशि प्रभा चतुर्वेदी उपस्थित रहीं। प्रो. चतुर्वेदी ने आईआईएएस और नंदपुर किले के बीच समानताएं साझा कीं। उन्होंने बताया कि कैसे एक समय वाइसराय लॉज रहा आईआईएएस निरंतर शैक्षणिक प्रयासों से आज एक विश्व-प्रसिद्ध विरासत पर्यटन और शैक्षणिक गंतव्य बन गया है। उन्होंने कहा कि गुलेर जैसा एक छोटा स्थान, जो विश्व प्रसिद्ध गुलेर लघु चित्रकला शैली का खजाना है, उसे भी निरंतर और शोध-आधारित प्रयासों से विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विरासत पर्यटन नए आकर्षण बनाने के बारे में नहीं है, बल्कि जो हमारे पास पहले से है उसके मूल्य को पहचानने के बारे में है।

इस आयोजन में कला और विरासत प्रेमियों की भारी उपस्थिति रही। प्रसिद्ध कला पारखी एवं विरासत प्रेमी नरेंद्र रावल ने दृश्य कला विभाग के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई अद्भुत चित्रकलाओं की प्रदर्शनी की सराहना की। विद्यार्थियों ने गुलेर चित्रकला शैली और किले के जीवन को अपने चित्रों में जीवंत किया था। उन्होंने स्कूल के विद्यार्थियों द्वारा किए गए विभिन्न प्रयासों, हेरिटेज वॉक मॉडल और व्याख्या की भी प्रशंसा की। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने और नीतियां बनाने के लिए विश्वविद्यालय के निरंतर प्रयासों का श्रेय दिया।

वहीं पर्यटन विभाग, हिमाचल प्रदेश के उप निदेशक विनय धीमान ने एक उपेक्षित विरासत स्थल को शैक्षणिक जुड़ाव के लिए चुनने की विश्वविद्यालय की पहल की सराहना की। उन्होंने बताया कि अपार संभावनाओं के बावजूद यह क्षेत्र 50 से अधिक वर्षों से उपेक्षित रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे गुलेर-नंदपुर सर्किट की पर्यटन क्षमता पर गहराई से शोध करें और एक ठोस, कार्यान्वयन योग्य प्रस्ताव तैयार करें ताकि इस लंबे समय से चले आ रहे अंतर को सरकार के समक्ष रखा जा सके।

इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के दृश्य कला विभाग द्वारा लगाई गई विशेष चित्र प्रदर्शनी रही। विभाग ने गुलेर राजवंश से संबंधित ऐतिहासिक चित्रों की एक समृद्ध प्रदर्शनी प्रस्तुत की, जिसमें गुलेर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शाही परंपरा और विश्व प्रसिद्ध गुलेर लघु चित्रकला शैली को दर्शाया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया