बेटी की आत्महत्या पर पिता ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र, ससुराल पक्ष पर लगाए आरोप
शिमला, 12 जनवरी (हि.स.)। शिमला ग्रामीण की धामी उप तहसील की चलाहल पंचायत के कंदरेण गांव निवासी खेमराज शर्मा ने अपनी बेटी की आत्महत्या के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी को ससुराल पक्ष की ओर से लगातार प्रताड़ित और मारपीट की जाती थी, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया।
खेमराज शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी सीमा शर्मा की उम्र 31 वर्ष थी। सीमा का विवाह वर्ष 2018 में तारा चंद शर्मा, पुत्र मस्तराम शर्मा, निवासी गांव कराड़ाघाट, डाकघर एवं ग्राम पंचायत दानोघाट, तहसील अर्की, जिला सोलन के साथ हुआ था। विवाह के बाद कुछ समय तक ससुराल में हालात सामान्य रहे, लेकिन बीते तीन से चार वर्षों से उनकी बेटी मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान थी।
पत्र में खेमराज शर्मा ने लिखा है कि कुछ समय पहले सीमा के साथ ससुराल में मारपीट की गई थी, जिससे उसके नाक और मुंह से खून बह रहा था। इसके बाद वह कैथू, शिमला में अपनी बुआ सुभद्रा के पास चली गई थी। आरोप है कि इस दौरान ससुराल पक्ष ने यह कहकर दाड़लाघाट पुलिस थाना में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि सीमा घर से भाग गई है। बाद में ससुराल वाले उसे कैथू से वापस अपने घर ले गए।
शिकायतकर्ता के अनुसार इसके बाद वह स्वयं बेटी के ससुराल गए और दोनों पक्षों में समझौता करवाया गया। ससुराल पक्ष ने भविष्य में मारपीट न करने का आश्वासन भी दिया था। इसके बावजूद हालात नहीं बदले।
खेमराज शर्मा ने बताया कि 5 जनवरी को कराड़ाघाट से गोपाल शर्मा का फोन आया, जिसे उनकी पत्नी सीता देवी ने उठाया। फोन पर बताया गया कि सीमा को चक्कर आ गए हैं और वह बेहोश है। जब वे कराड़ाघाट पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। मौके पर उन्होंने देखा कि सीमा एक पेड़ से फंदा लगाकर लटकी हुई थी। यह दृश्य देखकर वे पूरी तरह टूट गए।
उन्होंने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि पुलिस को इस मामले की गहन और निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाएं ताकि उनकी बेटी को न्याय मिल सके और सच्चाई सामने आ सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा