विभागों में अदालती आदेश लागू करने से पहले होगी समीक्षा, सरकार ने जारी किए नए निर्देश
शिमला, 18 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने ऐसे अदालती मामलों के निस्तारण के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है, जिनका असर राज्य की वित्तीय स्थिति, सेवा नियमों या सरकारी नीतियों पर पड़ सकता है। अब कोई भी विभाग अपने स्तर पर अदालत के आदेश लागू करने, अपील वापस लेने या अपील नहीं करने का निर्णय अकेले नहीं ले सकेगा। ऐसे मामलों में पहले उच्चस्तरीय समीक्षा की जाएगी और उसके बाद ही सरकार अंतिम निर्णय लेगी।
इस संबंध में मुख्य सचिव ने कार्मिक विभाग के माध्यम से सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, विश्वविद्यालयों, बोर्डों, निगमों और स्वायत्त संस्थाओं के प्रमुखों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि अलग-अलग विभागों द्वारा अलग-अलग स्तर पर लिए गए फैसलों से कई बार सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय बोझ पड़ता है। साथ ही समान मामलों में अलग-अलग निर्णय होने से प्रशासनिक और कानूनी जटिलताएं भी पैदा होती हैं।
सरकार के अनुसार कई मामलों में किसी एक कर्मचारी के पक्ष में आया अदालत का फैसला बाद में समान परिस्थितियों वाले बड़ी संख्या में कर्मचारियों पर भी लागू हो जाता है। इसका असर वेतन, पेंशन, नियमितीकरण, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर पड़ता है, जिससे सरकार पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय दायित्व आ सकता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे मामलों की पहले ही व्यापक समीक्षा करना है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों से बड़ा, बार-बार होने वाला या अप्रत्याशित वित्तीय भार पड़ने की आशंका हो, उनकी उच्चस्तरीय समीक्षा अनिवार्य होगी। इसके अलावा सेवा शर्तों, वेतन निर्धारण, पेंशन, नियमितीकरण, वरिष्ठता, पदोन्नति, कैडर पुनर्गठन, आरक्षण, अनुकंपा नियुक्ति, संविदा कर्मचारियों के लाभ और अन्य व्यापक प्रशासनिक प्रभाव वाले मामलों को भी इसी प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत ऐसे मामलों को भी विभाग अपने स्तर पर अंतिम रूप नहीं देंगे, जिनमें अदालत का फैसला भविष्य में दूसरे मामलों के लिए मिसाल बन सकता है या जिनका संबंध राज्य स्तर की नीतियों, नियमों, अधिसूचनाओं और सरकारी निर्देशों की व्याख्या से हो। यदि किसी निर्णय के बाद सरकार के खिलाफ बड़ी संख्या में नए दावे या मुकदमे आने की संभावना होगी, तब भी पहले उसका उच्चस्तरीय परीक्षण किया जाएगा।
सरकार ने कहा है कि कई बार विभाग या फील्ड स्तर पर अदालत के आदेशों को व्यापक समीक्षा के बिना लागू कर दिया जाता है या अपील वापस लेने अथवा अपील नहीं करने का निर्णय ले लिया जाता है। ऐसे फैसले बाद में पूरे राज्य के लिए नीतिगत और वित्तीय चुनौती बन सकते हैं। इसी कारण अब हर महत्वपूर्ण मामले में कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय पहलुओं का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा और उसके बाद राज्यहित को ध्यान में रखते हुए एक समान और संतुलित निर्णय लिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा