हिमाचल में पुराने कांट्रेक्ट कैरिज व्हीकल का नहीं होगा चालान, सरकार ने जारी किए निर्देश
शिमला, 27 अगस्त (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में 12 से 15 वर्ष की आयु वाले अनुबंधित यात्री वाहनों (कांट्रैक्ट कैरिज व्हीकल) के संचालकों को फिलहाल राहत दी गई है। प्रदेश की सीमा के भीतर संचालित होने वाले ऐसे वाहनों के चालान नहीं करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक अनुबंधित यात्री वाहनों की आयु सीमा के संबंध में केंद्र सरकार की ओर से अंतिम निर्णय नहीं आता।
उपमुख्यमंत्री ने वीरवार को विधानसभा में दिए वक्तव्य में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अनुबंधित यात्री वाहनों की आयु सीमा 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष करने की मांग को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है और यह मामला पहले ही भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के समक्ष उठाया जा चुका है। राज्य सरकार ने केंद्र से इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अपने स्तर पर अनुबंधित यात्री वाहनों की आयु सीमा 15 वर्ष नहीं कर सकती। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 59 के तहत मोटर वाहनों की आयु सीमा निर्धारित करने की शक्ति केंद्र सरकार के पास है। इसलिए केंद्रीय प्रावधान में बदलाव के बिना राज्य स्तर पर आयु सीमा बढ़ाने का निर्णय लेना संभव नहीं है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से इस विषय पर केवल अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है, बल्कि वाहन संचालकों की मांग को केंद्र के सामने लगातार उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय पर्यटक परमिट के तहत वाहनों की निर्धारित आयु सीमा 12 वर्ष से बढ़ाकर 15 वर्ष की गई है और यह व्यवस्था एक अप्रैल 2026 से लागू है। इसी आधार पर अनुबंधित यात्री वाहनों के लिए भी 15 वर्ष की आयु सीमा पर सकारात्मक विचार करने का अनुरोध केंद्र से किया गया है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के निर्णय तक इच्छुक वाहन संचालक नियमानुसार अखिल भारतीय पर्यटक परमिट के तहत आवेदन कर परमिट प्राप्त कर सकते हैं। वाहन संबंधी व्यवस्था और अखिल भारतीय पर्यटक परमिट पोर्टल का संचालन एवं प्रबंधन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र द्वारा किया जाता है। एक अप्रैल 2026 से अब तक 1009 वाहन संचालक इस पोर्टल के माध्यम से इस व्यवस्था का लाभ उठा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अखिल भारतीय पर्यटक परमिट की फीस कम करने का मामला भी केंद्र के समक्ष उठाया है। इसके अलावा राज्य की सीमा के भीतर चलने वाले अनुबंधित यात्री वाहनों की परमिट अवधि 15 वर्ष करने का अनुरोध भी केंद्र सरकार से किया जाएगा। इससे वाहन संचालकों को अधिक राहत मिल सकती है।
उपमुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर कुछ राज्यों में अनुबंधित यात्री वाहनों की आयु सीमा 25 वर्ष होने संबंधी दावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारी के आधार पर निष्कर्ष निकालना सही नहीं है। अलग-अलग राज्यों में लागू कानूनी प्रावधानों को देखने के बाद ही ऐसी तुलना की जानी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने प्रदेश में वाहनों की फिटनेस जांच के लिए स्वचालित परीक्षण केंद्रों की स्थिति भी सदन में रखी। केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 62 के तहत वाहनों की फिटनेस जांच स्वचालित परीक्षण केंद्रों के माध्यम से किए जाने की व्यवस्था है। हिमाचल में सरकारी क्षेत्र में बद्दी, हरोली और नादौन में तीन स्वचालित परीक्षण केंद्रों को मंजूरी दी गई है। निजी क्षेत्र में कांगड़ा के रानीताल, मंडी के कांगू, बिलासपुर, नालागढ़ और पांवटा साहिब में पांच केंद्रों को मंजूरी मिली है।
इनमें रानीताल और कांगू के केंद्र काम करना शुरू कर चुके हैं, जबकि अन्य केंद्रों में काम चल रहा है। इसके अतिरिक्त निजी क्षेत्र में पांच और स्वचालित परीक्षण केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इनमें कांगड़ा के जस्सूर या डमटाल और पालमपुर, सिरमौर के काला अंब, कुल्लू के भुंतर और चंबा के बनीखेत शामिल हैं।
उन्होंने माना कि प्रदेश में अभी स्वचालित परीक्षण केंद्रों की संख्या पर्याप्त नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार के समक्ष यह मामला भी प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा कि जब तक इन केंद्रों की व्यवस्था व्यापक स्तर पर स्थापित नहीं हो जाती, तब तक मैन्युअल फिटनेस जांच जारी रखने की अनुमति दी जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा