आईआईटी मंडी का लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम, समय रहते देगी भूस्खलन की चेतावनी

 






मंडी, 08 जुलाई (हि.स.)। आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए परिचालनात्मक भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित की है। आईआईटी मंडी के वैज्ञानिकों ने एक पूर्णतः परिचालनात्मक लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किया है। इस शोध का नेतृत्व आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के प्रो. डेरिक्स प्रेज़ शुक्ला ने किया। इस शोध में उनके शोधार्थी अंकित सिंह और नितेश धीमान भी शामिल रहे।

लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम एक ऐसी पूर्व चेतावनी प्रणाली है जो स्थलाकृति की संवेदनशीलता और वास्तविक समय वर्षा संबंधी आंकड़ों के आधार पर भूस्खलन की संभावना का पूर्वानुमान लगाती है। यह प्रणाली संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों के लिए समय रहते चेतावनी जारी करती है, जिससे प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां आवश्यक एहतियाती कदम उठा सकें।

प्रो. डेरिक्स प्रेज़ शुक्ला ने कहा कि मानसून की शुरुआत के साथ ही हमारा लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम वेब-आधारित एप्लिकेशन के माध्यम से प्रतिदिन भूस्खलन का पूर्वानुमान उपलब्ध कराता है। यह प्रणाली उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहले से पहचान करने में मदद करती है, जिससे प्रशासन और स्थानीय समुदाय समय पर निकासी एवं आपदा तैयारी जैसे आवश्यक कदम उठा सकें। उन्होंने आगे कहा कि उपग्रह आधारित पूर्व चेतावनी प्रणालियां आपदा जोखिम न्यूनीकरण में सबसे प्रभावी निवेशों में से एक हैं। क्योंकि ये वैज्ञानिक आंकड़ों को समय पर उपयोगी निर्णयों में बदलने में सक्षम बनाती हैं। भूस्खलन पूर्वानुमान मंच विशेष रूप से मानसून के दौरान, जब भूस्खलन का खतरा सबसे अधिक होता है, आपदा प्रबंधन एजेंसियों की तैयारी को मजबूत करता है।

भारत में उपलब्ध अन्य भूस्खलन पूर्व चेतावनी प्रणालियों की तुलना में आईआईटी मंडी का यह सिस्टम पूरे हिमालयी क्षेत्र को कवर करता है। इस प्रणाली को शोधकर्ताओं ने बहु-स्तरीय प्रक्रिया के माध्यम से विकसित किया। सबसे पहले भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण जीएसआई के डेटाबेस से लगभग 26,000 भूस्खलन घटनाओं का विश्लेषण कर भूस्खलन संवेदनशीलता मानचित्र तैयार किया गया। इसके लिए विभिन्न भूस्खलन कारकों को एन्सेम्बल मशीन लर्निंग मॉडल की सहायता से एकीकृत किया गया।

आपदा प्रबंधन एजेंसियों तक जानकारी आसानी से पहुंचाने के लिए आईआईटी मंडी की टीम ने जीइइ आधारित वेब पोर्टल विकसित किया है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता वर्तमान दिन के साथ-साथ पिछले तीन दिनों के भूस्खलन पूर्वानुमान देख सकते हैं। इसके अतिरिक्त, वे पीडीएफ बुलेटिन डाउनलोड कर सकते हैं तथा चयनित स्थानों के लिए व्हाट्सएप अलर्ट भी प्राप्त कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार यह लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम समय पर और स्थान-विशिष्ट चेतावनियां जारी कर भारतीय हिमालयी क्षेत्र में आपदा तैयारी और जोखिम न्यूनीकरण को मजबूत करेगा तथा आर्थिक नुक्सान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा