चुनाव आयुक्तों को कानूनी सुरक्षा देकर जवाबदेही कमजोर की गई : हिमराल

 


शिमला, 03 अक्टूबर (हि.स.)। जिला शिमला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों से संबंधित कानून को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी के ग्रामीण अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 2023 के कानून में चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कार्यों के संबंध में दीवानी और आपराधिक कार्यवाही से सुरक्षा देकर जवाबदेही का दायरा सीमित किया गया है। कानून की धारा 16 में वर्तमान या पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्त के आधिकारिक कर्तव्य के दौरान किए गए किसी कार्य को लेकर अदालत में सिविल या आपराधिक कार्यवाही शुरू करने या जारी रखने पर रोक का प्रावधान है।

उन्होंने शनिवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि कानून में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति की व्यवस्था भी बदली गई है। मौजूदा कानून के अनुसार समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इससे पहले मार्च 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने संसद द्वारा कानून बनाए जाने तक प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश वाली समिति के जरिए नियुक्ति की व्यवस्था का निर्देश दिया था।

उन्होंने कहा कि धारा 16 को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं भी दायर की गई हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार निरंकुश तरीके से काम कर रहे हैं। एसआईआर के नाम पर देश के 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं को उनके संवैधानिक अधिकार से वंचित किए जाने का भी उन्होंने आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस देशभर में “लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ” अभियान चला रही है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा