आचार संहिता में पहले भी हुईं कैबिनेट बैठकें, भाजपा का आरोप बेबुनियाद : नरेश चौहान
शिमला, 26 मई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि चुनाव नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आने से भाजपा बौखला गई है और अब आचार संहिता उल्लंघन जैसे आरोप लगाकर माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूर्व की भाजपा सरकारें भी चुनाव आचार संहिता के दौरान कैबिनेट बैठकें करती रही हैं।
नरेश चौहान ने कहा कि हाल ही में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक को लेकर भाजपा सवाल उठा रही है, जबकि इतिहास उठाकर देखा जाए तो भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी आचार संहिता के दौरान कई बार कैबिनेट बैठकें हुई थीं। उन्होंने कहा कि 23 दिसंबर 2020 और 5 जनवरी 2021 को पंचायती राज चुनावों के दौरान तत्कालीन जयराम ठाकुर सरकार ने कैबिनेट बैठकें की थीं। इसके अलावा 7 दिसंबर 2010 को प्रेम कुमार धूमल सरकार और 5 व 19 दिसंबर 2005 को वीरभद्र सिंह सरकार के समय भी आचार संहिता के बीच मंत्रिमंडल की बैठकें आयोजित हुई थीं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की हालिया कैबिनेट बैठक में कोई नई योजना घोषित नहीं की गई। ₹1500 देने वाली योजना पहले से लागू है और अन्य कई घोषणाएं भी पहले बजट में की जा चुकी थीं। ऐसे में भाजपा का आचार संहिता उल्लंघन का आरोप पूरी तरह बेबुनियाद है।
नरेश चौहान ने दावा किया कि जिला परिषद और बीडीसी चुनावों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को बढ़त मिल रही है और भाजपा के भीतर नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा पांच गुटों में बंटी हुई है और पार्टी के नेता आपस में ही संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में जनता भाजपा पर भरोसा क्यों करेगी।
उन्होंने कहा कि विपक्ष सिर्फ सरकार की आलोचना करने में लगा है, लेकिन प्रदेश हित में कोई ठोस सुझाव नहीं दे रहा।
प्रधान मीडिया सलाहकार ने केंद्र सरकार और भाजपा पर प्रदेश के मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आरडीजी बहाली और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये दिलाने के मामले में भाजपा ने कोई सहयोग नहीं किया।
उन्होंने कहा कि जब भाजपा प्रदेश के हितों के लिए केंद्र से मदद नहीं दिला पाई तो जनता उसे वोट क्यों देगी।
इस दौरान नरेश चौहान ने चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल और कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होते ही भाजपा सरकार ने आम लोगों पर महंगाई का बोझ डाल दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम कर लोगों को राहत देनी चाहिए थी, लेकिन इसके उलट लगातार महंगाई बढ़ाई जा रही है। चौहान ने कहा कि बढ़ती कीमतों का असर सीधे आम आदमी, व्यापारियों और परिवहन क्षेत्र पर पड़ रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा