हिमाचल से भेदभाव कर रही मोदी सरकार, तीन साल में नहीं मिली कोई आर्थिक मदद : उद्योग मंत्री
शिमला, 02 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि केंद्र हिमाचल प्रदेश के साथ लगातार भेदभाव कर रही है और राज्य का आर्थिक गला घोंटने की कोशिश की जा रही है।
शिमला में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में उद्योग मंत्री ने कहा कि बीते तीन वर्षों में हिमाचल को केंद्र से कोई विशेष आर्थिक मदद नहीं मिली, जबकि राज्य पहले से ही भारी वित्तीय संकट से जूझ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के नेता हिमाचल के बारे में दिल्ली में दुष्प्रचार कर रहे हैं और केंद्र सरकार से राज्य के लिए आने वाली मदद को रुकवाने का काम कर रहे हैं।
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि भाजपा सरकार अपने कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों की करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां छोड़कर गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मिशन रिपीट के उद्देश्य से तत्कालीन भाजपा सरकार ने प्रदेश के आर्थिक खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाला, जिसका खामियाजा आज की सरकार को भुगतना पड़ रहा है।
उद्योग मंत्री ने बताया कि बीते तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश को केंद्र से कुल 4270 करोड़ रुपये की मदद मिली है, लेकिन इसमें राज्य के हिस्से को घटा दिया जाए तो वास्तविक सहायता केवल 3554 करोड़ रुपये ही रह जाती है, जो प्रदेश की जरूरतों के मुकाबले बहुत कम है।
उद्योग मंत्री ने पूर्व की भाजपा सरकार के फैसलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का फैसला किया, जिससे बिजली बोर्ड को हर साल करीब 1200 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा हिमाचल पथ परिवहन निगम यानी एचआरटीसी को भी भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि भाजपा ने हिमाचल की आर्थिक स्थिति खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अब भी उसके नेता दिल्ली जाकर राज्य के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्र से मिलने वाला जीएसटी मुआवजा, रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट और राज्य की लोन लिमिट में कटौती के कारण हिमाचल को भारी नुकसान हो रहा है। उद्योग मंत्री के अनुसार इन सभी कारणों से हिमाचल प्रदेश सरकार को अब तक 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है, जिससे विकास कार्यों और जनकल्याण योजनाओं पर असर पड़ रहा है।
इस बीच उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने यह भी जानकारी दी कि शिमला में उद्योग विभाग की ओर से एमएसएमई फेस्ट का आयोजन किया जा रहा है। इसका शुभारंभ 3 जनवरी को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू करेंगे।
उन्होंने कहा कि इस फेस्ट का उद्देश्य छोटे और मझोले उद्यमियों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए मंच उपलब्ध कराना है। साथ ही उद्योग विभाग उद्यमियों की समस्याओं को भी समझेगा और उनके समाधान के प्रयास किए जाएंगे। फेस्ट में हिमाचली पारंपरिक व्यंजनों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे स्थानीय संस्कृति और उत्पादों को बढ़ावा मिल सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा