पहाड़ी राज्यों के लिए पीएम ई-बस योजना में विशेष छूट दे केंद्र सरकार : सुक्खू
शिमला, 16 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पीएम ई-बस सेवा योजना के मौजूदा प्रावधानों को पहाड़ी राज्यों के लिए व्यावहारिक बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन मैदानी राज्यों की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण है, इसलिए इस योजना में विशेष छूट दी जानी चाहिए।
नई दिल्ली में शुक्रवार को केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से शिष्टाचार भेंट के दौरान मुख्यमंत्री ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत फिलहाल पहाड़ी राज्यों के लिए किसी तरह की अलग व्यवस्था या रियायत नहीं है। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि हिमाचल प्रदेश इस योजना का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा, जबकि राज्य सरकार ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के मौजूदा मानदंडों के अनुसार केवल 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों को ही इसमें शामिल किया गया है। इस वजह से हिमाचल प्रदेश में केवल शिमला शहर को ही योजना के दायरे में लाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य के अन्य शहर जैसे धर्मशाला, मंडी, सोलन, पालमपुर, हमीरपुर, ऊना और बद्दी तेजी से आर्थिक गतिविधियों और मानव संसाधन विकास के केंद्र बन रहे हैं। इन शहरों में भी सार्वजनिक परिवहन की जरूरत लगातार बढ़ रही है, इसलिए जनसंख्या के मानदंड में ढील दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हिमाचल सरकार राज्य में चरणबद्ध तरीके से डीजल बसों को इलेक्ट्रिक बसों से बदलने की दिशा में काम कर रही है। सरकार ने करीब 1500 डीजल बसों को भविष्य में इलेक्ट्रिक बसों से बदलने का निर्णय लिया है। इसी कड़ी में राज्य सरकार अपने संसाधनों से कैपिटल एक्सपेंडिचर मॉडल के तहत 297 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद कर रही है, ताकि प्रदूषण कम हो और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा मिल सके।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि ओपरेशनल एक्सपेंडिचर मॉडल के तहत पहाड़ी राज्यों के लिए माइलेज की शर्तों को व्यावहारिक बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए 150 किलोमीटर तक का माइलेज अधिक उपयुक्त और संभव है। इसके साथ ही उन्होंने संचालन सहायता राशि को मौजूदा 22 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 52 रुपये प्रति किलोमीटर करने की मांग भी रखी, ताकि हिमाचल पथ परिवहन निगम बिना घाटे के इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कर सके।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के एकीकृत कार्यालय के लिए सुंदरनगर में उपलब्ध 47 बीघा भूमि के हस्तांतरण और आवंटन के लिए भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र दिलाने में सहयोग का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में एचपीपीसीएल के कार्यालय राज्य के अलग-अलग स्थानों पर हैं, जिससे कामकाज में दिक्कत आती है। एकीकृत कार्यालय बनने से कार्य संचालन अधिक सुचारू होगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि बेहतर प्रदर्शन को प्रोत्साहित करने और समान प्रतिपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूंजी सहायता को वास्तव में प्राप्त माइलेज के आधार पर दिया जाना चाहिए। इससे राज्यों को योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा