हिमाचल में 2.56 लाख किसानों ने अपनाई प्राकृतिक खेती : मुख्यमंत्री सुक्खू

 


शिमला, 04 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती का दायरा लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि प्रदेश के 2,56,870 किसान अब 44,784.73 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को देश का पहला प्राकृतिक खेती वाला राज्य बनाना है और इस दिशा में हर संभव सहयोग दिया जाएगा।

शनिवार को कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए पूरी गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की नई पहलों के बाद प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जो किसान पहले खेती छोड़ चुके थे, वे भी अब दोबारा खेती की ओर लौट रहे हैं और प्राकृतिक खेती में रुचि दिखा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग में प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के लिए अलग मार्केटिंग विंग स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों की बिक्री के लिए डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म का भी उपयोग किया जाए, जिससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर बाजार मिल सके।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने प्राकृतिक खेती से तैयार फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू किया है। सरकार ने प्राकृतिक खेती से पैदा होने वाले गेहूं का एमएसपी 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की का 50 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी का 150 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी की जौ का 80 रुपये प्रति किलोग्राम और अदरक का 30 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू होने के बाद प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ा है और सहकारी डेयरी प्रणाली से जुड़ने वाले किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने गाय के दूध का एमएसपी 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का एमएसपी 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया है।

उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत डेयरी किसानों को अधिक लाभ पहुंचाना है। पिछले साढ़े तीन वर्षों में प्रदेश के दूध उत्पादकों को 300 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

बैठक में मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल क्षेत्र को प्राकृतिक खेती पंचायत घोषित करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने बड़ा भंगाल में उगाई जाने वाली राजमाह के लिए भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग हासिल करने की प्रक्रिया शुरू करने को भी कहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा