मेरिट के आधार पर होगी सीबीएसई अध्यापकों की नियुक्ति: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर

 

शिमला, 02 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई से जुड़े स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति अब मेरिट के आधार पर करने की तैयारी है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने गुरुवार को शिमला में मीडिया से बातचीत में कहा कि इस संबंध में सरकार ने नीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग से जुड़े विभिन्न विषयों पर कैबिनेट सब कमेटी की बैठक हुई, जिसमें कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सीबीएसई स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति मेरिट के आधार पर की जाएगी। इसके साथ ही प्रिंसिपल पद पर पदोन्नति की नीति भी मेरिट आधारित होगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में तैयार की जा रही सूची लगभग 90 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। जरूरत पड़ने पर प्रस्ताव को मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि कैबिनेट सब कमेटी ने इस व्यवस्था पर सहमति जताई है और अब अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी। मुख्यमंत्री के स्तर पर निर्णय होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में अध्यापकों के कई पद खाली हैं और जरूरत वाले स्कूलों में अतिरिक्त अध्यापकों की तैनाती की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध अध्यापकों को आवश्यकता के अनुसार उन स्थानों पर भेजा जा सकता है, जहां उनकी सबसे अधिक जरूरत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूलों के विलय की प्रक्रिया मौजूदा शैक्षणिक सत्र के बीच में नहीं की जाएगी।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए जम्मू-कश्मीर की कुछ सफल व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है और उनमें से उपयुक्त व्यवस्थाओं को हिमाचल प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। इसके तहत स्कूलों का ऑनलाइन निरीक्षण शुरू करने की योजना है। दूरदराज के क्षेत्रों के लिए एक वर्ष की विशेष व्यवस्था तैयार करने पर भी काम चल रहा है। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में विद्या समीक्षा केंद्र स्थापित करने की दिशा में भी सरकार कदम उठा रही है।

रोहित ठाकुर ने कहा कि रामानुजन स्टूडेंट डिजिटल डिवाइस योजना के तहत मेधावी विद्यार्थियों को जल्द लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 16 हजार रुपये की राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से दी जाएगी। फिलहाल योजना के क्रियान्वयन में कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं, जिन्हें दूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रति छात्र 16 हजार रुपये की सहायता देने के अपने निर्णय पर कायम है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा