सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति में देरी पर छात्र अभिभावक मंच ने उठाए सवाल

 

शिमला, 05 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर छात्र अभिभावक मंच ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। मंच का कहना है कि नियुक्तियां समय पर नहीं होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और इसका सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है।

मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा और सह संयोजक विवेक कश्यप ने रविवार को जारी बयान में कहा कि सरकार ने सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए शुरू से ही स्पष्ट नीति बनाई थी। इसके अनुसार मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को उनकी पसंद के स्कूलों में नियुक्ति दी जानी थी। उन्होंने कहा कि मेरिट सूची भी जारी हो चुकी है, फिर भी अब तक चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिली है। उनका कहना है कि जब भर्ती की नीति पहले से तय थी तो नियुक्ति प्रक्रिया में इतनी देरी का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए।

मंच ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अभी तक सरकारी सीबीएसई स्कूलों के विद्यार्थियों को सीबीएसई पाठ्यक्रम की किताबें उपलब्ध नहीं करा सकी है। इसके कारण अभिभावकों और विद्यार्थियों को इंटरनेट से पाठ्यक्रम डाउनलोड कर उसकी फोटोस्टेट करानी पड़ रही है। उनका कहना है कि इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

बयान में कहा गया है कि सरकारी सीबीएसई स्कूल इस समय प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। मंच के अनुसार इन स्कूलों से पहले कई शिक्षक हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के स्कूलों में स्थानांतरित हो चुके हैं। जो शिक्षक अभी इन स्कूलों में कार्यरत हैं, उनमें से कई की ड्यूटी जनगणना सर्वेक्षण में लगी हुई है। ऐसे में विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

मंच का कहना है कि इस स्थिति के कारण कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का दाखिला सरकारी सीबीएसई स्कूलों से हटाकर दूसरे सरकारी या निजी स्कूलों में करा दिया है। उनका दावा है कि यदि मेरिट के आधार पर समय पर नियुक्तियां कर दी जातीं तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

छात्र अभिभावक मंच ने सरकारी सीबीएसई स्कूलों के संचालन के लिए उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। इस समिति में शिक्षा मंत्री, तकनीकी शिक्षा मंत्री, राजस्व एवं बागवानी मंत्री और शिक्षा सचिव भी शामिल हैं। मंच ने मुख्यमंत्री से समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

मंच ने सरकार से मांग की है कि चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग कर उन्हें तय नीति के अनुसार बिना और देरी के नियुक्ति दी जाए तथा सभी सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर की जाए। मंच ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नियुक्तियां नहीं की गईं और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती रही तो छात्र, अभिभावक और छात्र अभिभावक मंच सरकार के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा