जंक फूड, खराब जीवनशैली और देर से जांच बढ़ा रहे कैंसर का खतरा : डॉक्टर जितेंद्र रोहिला
शिमला, 17 जून (हि.स.)। कैंसर का सबसे बड़ा इलाज समय पर पहचान है, लेकिन अधिकांश लोग तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। जंक फूड का बढ़ता चलन, असंतुलित खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज करना और शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से न लेना कैंसर के मामलों में वृद्धि की बड़ी वजह बन रहे हैं।
यह कहना है फोर्टिस कैंसर संस्थान, मोहाली के सीनियर कंसल्टेंट जीआई सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. जितेंद्र रोहिला का।
डॉ. रोहिला ने शिमला में बताया कि यदि कैंसर का पता शुरुआती चरण, खासकर स्टेज-1 में चल जाए, तो उपचार की सफलता की संभावना काफी अधिक होती है। लेकिन जागरूकता की कमी और लापरवाही के कारण कई मरीज तब डॉक्टरों तक पहुंचते हैं जब बीमारी शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल चुकी होती है। ऐसे मामलों में उपचार अधिक जटिल और खर्चीला हो जाता है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में फोर्टिस अस्पताल मोहाली में एक 63 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया गया, जो स्यूडोमायक्सोमा पेरिटोनी (पीएमपी) नामक दुर्लभ कैंसर से पीड़ित थीं। यह बीमारी बेहद दुर्लभ मानी जाती है और इसके केवल एक से दो मामले प्रति दस लाख आबादी में सामने आते हैं। महिला लंबे समय से पेट में सूजन, भूख कम लगने और मल त्याग की आदतों में बदलाव जैसी समस्याओं से परेशान थीं।
डॉ. रोहिला के अनुसार जांच में पता चला कि कैंसर अपेंडिक्स से शुरू होकर पेट की अंदरूनी परत यानी पेरिटोनियम तक फैल चुका था। इस बीमारी में म्यूकिन नामक जेली जैसा पदार्थ पेट के भीतर जमा होने लगता है, जिससे पेट फूल जाता है और आंतों समेत कई अंग प्रभावित हो सकते हैं। पीईटी-सीटी स्कैन में मरीज के पेट के विभिन्न हिस्सों में ट्यूमर जमाव के संकेत मिले, जिसके बाद डॉक्टरों की टीम ने साइटोरिडक्टिव सर्जरी (सीआरएस) और हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (हाइपेक) सर्जरी करने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि यह जटिल सर्जरी करीब नौ घंटे तक चली। इस दौरान कैंसरग्रस्त हिस्सों को हटाने के साथ लीवर और आंतों से ट्यूमर भी निकाले गए। इसके बाद करीब 90 मिनट तक पेट के भीतर गर्म कीमोथेरेपी दी गई। सीआरएस-हाइपेक को इस प्रकार के कैंसर के लिए दुनिया भर में गोल्ड स्टैंडर्ड उपचार माना जाता है। इस सर्जरी पर सामान्य तौर पर लगभग तीन लाख रुपये का खर्च आता है। सफल उपचार के बाद मरीज को दस दिन में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और अब वह सामान्य जीवन जी रही हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि शरीर में किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करें, नियमित स्वास्थ्य जांच करवाएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। उनके अनुसार कैंसर से बचाव और सफल उपचार की दिशा में जागरूकता और समय पर जांच सबसे महत्वपूर्ण हथियार हैं।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा