हिमाचल प्रदेश में बीपीएल चयन की शर्तों में ढील, दिव्यांग और श्रमिक परिवार होंगे शामिल
शिमला, 05 फ़रवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में बीपीएल परिवारों के चयन से जुड़ी शर्तों में सरकार ने कुछ अहम राहत दी है। अब 40 फीसदी या उससे अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्ति वाले परिवार, मनरेगा के तहत कम से कम 80 दिन काम करने वाले परिवार और किसी हादसे में रीढ़ की हड्डी की गंभीर चोट झेल चुके लोगों के परिवारों को बीपीएल सूची में शामिल किए जाने का रास्ता आसान किया गया है। इस संदर्भ में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से अधिसूचना जारी हुई है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को समय पर सरकारी मदद दिलाना है।
नई व्यवस्था के तहत जिन परिवारों में कोई सदस्य 40 फीसदी या उससे अधिक विकलांग है, उन्हें बीपीएल चयन में प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे परिवारों को इलाज, देखभाल और रोजमर्रा की जरूरतों पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है, जबकि कमाई के साधन सीमित होते हैं। इसी वजह से सरकार ने इन्हें विशेष श्रेणी में रखने का फैसला किया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा पर निर्भर परिवारों को भी इस व्यवस्था से लाभ मिलेगा। जिन परिवारों ने मनरेगा में 80 दिन या उससे अधिक काम किया है, उन्हें बीपीएल सूची में शामिल किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि मनरेगा पर लंबे समय तक निर्भर रहना परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।
इसके अलावा सड़क दुर्घटना या किसी अन्य हादसे में रीढ़ की हड्डी की गंभीर चोट झेल चुके लोगों के परिवारों को भी बीपीएल के दायरे में लाया गया है। ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति अक्सर लंबे समय तक या स्थायी रूप से काम करने में असमर्थ हो जाता है, जिससे पूरे परिवार की आमदनी प्रभावित होती है।
आदेश के अनुसार बीपीएल चयन की प्रक्रिया पहले की तरह पंचायत स्तर पर जांच और सत्यापन के जरिए की जाएगी ताकि सही परिवारों को ही लाभ मिले। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र परिवार सूची से वंचित न रहे।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा