सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी चूड़धार में पहली बार केले, पीपल और हैज के पौधों का रोपण
नाहन, 11 सितंबर (हि.स.)। जिला सिरमौर की सबसे ऊंची चोटी लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित चूड़ेश्वर महादेव की तपोस्थली चूड़धार में पहली बार केले के पौधे, पीपल तथा हैज की रोपाई की गई है। यहां स्थित शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। पर्यावरण प्रेमी विजय कुमार ने चूड़ेश्वर महाराज मंदिर परिसर की शोभा बढ़ाने के लिए पीपल, केले के पौधे और हैज की रोपाई की।
विजय कुमार ने बताया कि वैसे तो यह पौधे मध्यवर्ती क्षेत्र में उगते हैं, लेकिन यह उनका पहला प्रयास है। देवस्थान में पीपल और केले के पौधे पूजा पद्धति के लिए काफी उपयोगी होते हैं। चूड़धार की चोटी सर्दियों में बर्फ से ढकी रहती है, ऐसे में इन पौधों का उगना वातावरण पर आधारित रहेगा।
पर्यावरण प्रेमी स्वर्गीय किंकरी देवी पार्क समिति के सदस्यों द्वारा नौहराधार-जमनाला-तीसरी मार्ग से प्लास्टिक तथा कचरे को इकट्ठा कर डस्टबिन में डाला गया।पर्यावरण प्रेमी विजय कुमार तथा वार्ड सदस्य कमल राज चौहान ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि पॉलीथीन, प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट, कागज इत्यादि को इधर-उधर न फेंकें, बल्कि इकट्ठा कर डस्टबिन में डालें, ताकि हमारा जलवायु और प्राकृतिक जल स्रोत साफ-सुथरा बना रहे।चूड़ेश्वर सेवा समिति के अध्यक्ष ठाकुर जोगिंदर सिंह चौहान ने बताया कि पीपल व केले के पौधों को बर्फ से बचाने के लिए गुमटा का प्रबंध किया जाएगा ताकि पौधों के ऊपर सीधे बर्फ न पड़े।
इसके साथ ही मंदिर मार्ग पर सफाई अभियान भी चलाया गया। साथही श्रद्धालुओं से अपील की है कि पॉलीथीन, प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट, कागज इत्यादि को इधर-उधर न फेंकें, बल्कि इकट्ठा कर डस्टबिन में डालें, ताकि हमारा जलवायु और प्राकृतिक जल स्रोत साफ-सुथरा बना रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर