पर्यटन निगम के होटल देवभूमि की शान, इन्हें निजी हाथों में देने की साजिश: बीएमएस
शिमला, 08 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के आठ प्रमुख होटलों को ऑपरेशन और मेंटिनेंस के लिए निजी ऑपरेटरों को सौंपने के फैसले को लेकर भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। बीएमएस का कहना है कि पर्यटन निगम के होटल देवभूमि हिमाचल की पहचान और शान हैं और इन्हें निजी हाथों में देने की कोशिश एक साजिश का हिस्सा प्रतीत होती है।
भारतीय मजदूर संघ हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष मदन राणा और प्रदेश महामंत्री यशपाल ने अन्य पदाधिकारियों के साथ जारी संयुक्त बयान में कहा कि पर्यटन निगम के आठ होटलों को आउटसोर्सिंग के जरिए निजी ऑपरेटरों को सौंपने के निर्णय के पीछे एक सेवानिवृत्त उच्च अधिकारी की भूमिका बताई जा रही है। उनका आरोप है कि यह अधिकारी लंबे समय से पर्यटन निगम के होटलों को निजी क्षेत्र के हवाले करने की कोशिश करता रहा है।
बीएमएस नेताओं के अनुसार यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का प्रयास हुआ हो। उनका कहना है कि पहले भी कई बार पर्यटन निगम के होटलों को बेचने या निजी हाथों में देने की कोशिश की गई, लेकिन कर्मचारियों और यूनियन के विरोध के कारण ऐसे प्रयास सफल नहीं हो पाए। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार के समय भी इस अधिकारी ने पर्यटन निगम के होटलों को बेचने की पूरी योजना तैयार कर ली थी।
संघ के नेताओं का कहना है कि जब उस समय के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को इस मामले की जानकारी मिली थी तो उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए उस अधिकारी को पद से हटा दिया था। बीएमएस का आरोप है कि अब वही सेवानिवृत्त अधिकारी सरकार में भूमिका में रहकर फिर से पर्यटन निगम के होटलों को निजी हाथों में देने की कोशिश कर रहा है।
बीएमएस के अध्यक्ष मदन राणा और प्रदेश महामंत्री यशपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले भी कई बार सार्वजनिक मंचों से कह चुके हैं कि प्रदेश का कोई भी होटल बेचा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि जो होटल पहले से ठेके पर दिए गए हैं, उन्हें भी वापस लिया जाएगा। ऐसे में अब पर्यटन निगम के आठ होटलों को निजी ऑपरेटरों को देने की प्रक्रिया कई सवाल खड़े करती है।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि पर्यटन निगम के होटल केवल व्यावसायिक संपत्ति नहीं हैं, प्रदेश के पर्यटन और पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थान हैं। ऐसे में इनके संचालन और भविष्य को लेकर कोई भी फैसला प्रदेश के हितों को ध्यान में रखते हुए पारदर्शिता के साथ लिया जाना चाहिए।
भारतीय मजदूर संघ ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की जांच करवाने की मांग की है। संघ का कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि मुख्यमंत्री के सार्वजनिक रुख के बावजूद पर्यटन निगम के होटलों को बार-बार निजी हाथों में देने का प्रयास आखिर कौन और क्यों कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा