राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल, जनता पर बढ़ते खर्च का किया जिक्र

 


शिमला, 23 सितंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता पर कर्ज, टैक्स और महंगाई का बोझ बढ़ रहा है, जबकि सरकार कार्यालयों और अन्य सुविधाओं पर खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार के व्यवस्था परिवर्तन के दावे से अलग तस्वीर पेश करता है।

बिंदल ने बुधवार को कहा कि आम लोगों को मिलने वाली राहतों में बदलाव किए गए हैं। बिजली सब्सिडी में बदलाव के साथ बिजली पर विभिन्न सेस लगाए गए हैं। स्टाम्प ड्यूटी और एचआरटीसी से जुड़ी रियायतों में भी बदलाव हुए हैं। दूसरी ओर सत्ता में बैठे लोगों के लिए कार्यालयों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

उन्होंने सरकारी अस्पतालों में पर्ची के लिए 10 रुपये लिए जाने का जिक्र करते हुए कहा कि गरीब और बीमार व्यक्ति से भी शुल्क लिया जा रहा है। बिंदल ने हिमकेयर योजना के तहत उपचार को लेकर लोगों और अस्पतालों की समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लोगों को राहत नहीं मिल रही है, जबकि सरकार अन्य खर्च कर रही है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पेंशनर्स अपनी देनदारियों और समय पर पेंशन के लिए आवाज उठा रहे हैं। बेरोजगार युवा रोजगार की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने चुनाव से पहले एक लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन यह वादा पूरा नहीं हुआ।

बिंदल ने कहा कि महिलाएं भी सरकार को चुनावी वादे याद दिला रही हैं। आम परिवार बिजली, पानी, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते खर्च से प्रभावित हैं। उन्होंने स्कूलों को बंद और मर्ज करने के फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है।

उन्होंने कहा कि एक ओर कार्यालयों के उद्घाटन हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनता की सेवा और विकास कार्यों से जुड़े सरकारी कार्यालय बंद या पुनर्गठित किए जा रहे हैं।

बिंदल ने कहा कि हाल ही में नेशनल हाईवे से संबंधित एक डिवीजन और आठ सब-डिवीजन बंद करने की अधिसूचना जारी की गई है। उन्होंने कहा कि ये कार्यालय सड़क निर्माण, मरम्मत और क्षेत्रीय विकास कार्यों से जुड़े थे। सरकार को बताना चाहिए कि इनके बंद होने से संबंधित क्षेत्रों की जनता और सड़क परियोजनाओं पर क्या असर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि गरीब आदमी की राहत के लिए पैसा नहीं, हिमकेयर के लिए पैसा नहीं, विकास के कार्यालय चलाने के लिए पैसा नहीं, लेकिन सत्ता की सुख-सुविधाओं और कार्यालयों के लिए करोड़ों रुपये उपलब्ध हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा