नौणी विश्वविद्यालय के प्रशासनिक फैसलों की जांच की मांग, भाजपा ने उठाए सवाल

 


शिमला, 28 अक्टूबर (हि.स.)। भाजपा ने डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के प्रशासनिक फैसलों और कार्यवाहक कुलपति की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग की है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एवं संगठनात्मक जिला सोलन के प्रभारी संदीपनी भारद्वाज ने प्रबंधन मंडल की बैठकों की कार्यवाही, शिक्षकों के स्थानांतरण, लंबित कानूनी मामलों और परीक्षा प्रणाली से जुड़े आरोपों की जांच कराने की मांग उठाई है।

भारद्वाज ने बुधवार को कहा कि कार्यवाहक कुलपति के विरुद्ध सीबीआई न्यायालय, देहरादून में दो आरोपपत्र लंबित होने और संबंधित मामलों में अभियोजन स्वीकृति दिए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में पूर्व प्रशासनिक कार्यकाल से संबंधित विभागीय जांचें लंबित होने के भी आरोप हैं। उन्होंने कहा कि आरोपपत्र लंबित होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। इन मामलों की वास्तविक स्थिति आधिकारिक अभिलेखों से स्पष्ट की जानी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्व कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल का कार्यकाल 8 मई 2026 को समाप्त होने के बाद कार्यवाहक कुलपति को अतिरिक्त कार्यभार सौंपते समय लंबित मामलों का क्या परीक्षण किया गया था।

भारद्वाज ने प्रबंधन मंडल की 119वीं से 123वीं बैठकों की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि 12 अगस्त 2026 को हुई 123वीं बैठक के कार्यवृत्त में कथित बदलाव और सरकारी अधिकारियों की आपत्तियों की जांच होनी चाहिए। उन्होंने मूल अभिलेख सुरक्षित रखने और विवादित फैसलों की वैधानिक समीक्षा की मांग की।

उन्होंने कहा कि कुलसचिव सिद्धार्थ आचार्य की शक्तियां वापस लेने का 5 अक्टूबर का आदेश प्रदेश सरकार ने 6 अक्टूबर को निरस्त कर दिया था। सरकार ने स्पष्ट किया था कि कुलसचिव के वैधानिक अधिकार दूसरे अधिकारी को नहीं सौंपे जा सकते।

भारद्वाज ने विश्वविद्यालय में करीब 180 स्थानांतरण, कर्मचारियों पर दबाव और शैक्षणिक गतिविधियों में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों की जांच की मांग की। उन्होंने थुनाग महाविद्यालय में शिक्षकों की उपलब्धता और कृषि विज्ञान केंद्रों में रिक्त पदों की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा।

उन्होंने परीक्षा मूल्यांकन को राजनीतिक आधार पर प्रभावित करने के आरोपों की भी जांच कराने की मांग की। भारद्वाज ने कहा कि सरकार सभी आरोपों की समयबद्ध जांच कराए और दोष प्रमाणित होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई करे।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा