कर्ज बढ़ाने की मांग पर भाजपा ने सुक्खू सरकार को घेरा, वित्तीय कुप्रबंधन का लगाया आरोप
शिमला, 09 सितंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में वित्तीय संकट को लेकर भाजपा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात पर सवाल उठाए हैं। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने अपने वित्तीय कुप्रबंधन से प्रदेश को गंभीर आर्थिक संकट में पहुंचा दिया है और अब इससे निपटने के लिए केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय सहायता और कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने की मांग कर रही है।
संदीपनी भारद्वाज ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री के सामने 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद वित्त वर्ष 2026-27 से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के कारण हिमाचल को करीब 8,000 करोड़ रुपये के वार्षिक वित्तीय अंतर का सामना करने की बात रखी है। उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य सरकार को पहले से पता था कि राजस्व घाटा अनुदान लगातार कम हो रहा है और इसके बाद बंद होना है, तो पिछले वर्षों में वित्तीय अनुशासन मजबूत करने और राज्य के अपने राजस्व स्रोत बढ़ाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री एक ओर हिमाचल को वर्ष 2032 तक आत्मनिर्भर बनाने की बात करते हैं और दूसरी ओर केंद्र से अतिरिक्त आर्थिक सहायता तथा कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता के लिए बेहतर वित्तीय प्रबंधन, अनावश्यक खर्च पर नियंत्रण और राज्य की आय बढ़ाने की जरूरत है।
भारद्वाज ने हालिया नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी सीएजी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर रिपोर्ट में गंभीर आंकड़े सामने आए हैं। उनके अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में हिमाचल का राजस्व घाटा 6,804.61 करोड़ रुपये और वित्तीय घाटा 12,611.05 करोड़ रुपये रहा। उन्होंने कहा कि राज्य की बकाया देनदारियां सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी जीएसडीपी के 44.11 प्रतिशत तक पहुंच गई हैं।
उन्होंने कांग्रेस सरकार से केंद्र पर आर्थिक संकट का दोष डालने की राजनीति बंद करने की मांग की। भारद्वाज ने कहा कि केंद्र सरकार हिमाचल की सड़क, स्वास्थ्य, जल शक्ति, ऊर्जा, विकास परियोजनाओं और आपदा राहत सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करती रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मौजूदा दिल्ली यात्रा के दौरान भी केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय सहायता के साथ अलग-अलग परियोजनाओं के लिए सहयोग मांगा गया है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से केंद्र के सामने मुफ्त बिजली के बदले नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने, शानन और बैरा स्यूल बिजली परियोजनाओं से जुड़े मामलों, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में हिमाचल के अधिकारों और दो स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति जैसे विषय उठाए जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश हित से जुड़े उचित मामलों के समाधान के पक्ष में है, लेकिन राज्य सरकार अपनी वित्तीय स्थिति की जिम्मेदारी केंद्र पर डालकर बच नहीं सकती।
भारद्वाज ने कहा कि राज्य सरकार को जनता को यह बताना चाहिए कि जब आय की तुलना में खर्च लगातार बढ़ रहा है, तो वित्तीय सुधार के लिए उसका रोडमैप क्या है। उन्होंने कहा कि केवल कर, शुल्क और फीस बढ़ाना और उसके बाद कर्ज की सीमा बढ़ाने की मांग करना आर्थिक नीति नहीं हो सकती।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा