बीबीएमबी बिजली बकाया मामले में हिमाचल के अधिकारों की जीत, धूमल सरकार और केंद्र के प्रयासों की अहम भूमिका: बिंदल

 


नाहन, 07 नवंबर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की जलविद्युत परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के लंबित बिजली बकाये को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के 6 नवंबर के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला हिमाचल प्रदेश की जनता के अधिकारों की जीत है, जिसके पीछे दशकों का कानूनी संघर्ष और केंद्र सरकार के प्रयास रहे हैं।

डॉ. बिंदल ने कहा कि इस मामले की शुरुआत वर्ष 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद हुई थी। हिमाचल प्रदेश ने वर्ष 1969 में अपनी हिस्सेदारी का दावा केंद्र सरकार के समक्ष रखा था। समाधान नहीं निकलने पर वर्ष 1996 में सर्वोच्च न्यायालय में मूल वाद दायर किया गया। उन्होंने बताया कि 27 सितंबर 2011 को सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत हिस्से के कानूनी अधिकार को मान्यता दी थी। उस समय प्रदेश में प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार थी।

उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 2011 में हिमाचल के अधिकार निर्धारित होने के बावजूद वर्ष 2012 में सत्ता में आई कांग्रेस सरकार प्रदेश को बिजली का पूरा बकाया क्यों नहीं दिला पाई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से 2022 तक जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी यह मामला प्रदेश के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बना रहा।

डॉ. बिंदल के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इस विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तुत कैशलेस सेटलमेंट फॉर्मूले के तहत नकद भुगतान के बजाय बिजली के रूप में बकाये का निपटारा करने का प्रस्ताव दिया गया, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने स्वीकार किया।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की गणना के अनुसार हिमाचल का कुल बिजली बकाया 13,066 मिलियन यूनिट निर्धारित हुआ। इसमें 420.77 करोड़ रुपये की पूंजीगत देनदारी को 3.85 रुपये प्रति यूनिट की दर से समायोजित करने के बाद लगभग 1,093 मिलियन यूनिट की कटौती हुई। इस प्रकार प्रदेश को लगभग 11,973 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी। आदेश के अनुसार पंजाब और हरियाणा अगले 20 वर्षों तक अक्टूबर से मार्च के दौरान प्रतिवर्ष लगभग 598 मिलियन यूनिट बिजली उपलब्ध कराएंगे।

किशाऊ बांध परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने परियोजना की 90 प्रतिशत लागत वहन करने की स्वीकृति दी है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सिरमौर के किसानों के हितों की अनदेखी कर उनका पानी दिल्ली और राजस्थान को दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को राजनीतिक श्रेय लेने के बजाय प्रदेश की जनता को इन सभी मामलों का पूरा इतिहास बताना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर