बीबीएमबी से हिमाचल को 20 साल में 15 हजार करोड़ रुपये तक का लाभ, सुप्रीम कोर्ट ने 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देने के दिये आदेश

 

शिमला, 06 नवंबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की परियोजनाओं में अपनी हिस्सेदारी के रूप में अब नकद राशि के बजाय बिजली मिलेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदेश को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देने के आदेश दिए हैं। इस व्यवस्था के तहत हिमाचल को हर साल करीब 600 मिलियन यूनिट यानी 60 करोड़ यूनिट बिजली मिलने का रास्ता साफ हुआ है। खास बात यह है कि यह बिजली अक्टूबर से मार्च के बीच दी जाएगी। इस अवधि में बिजली की मांग और बाजार में कीमतें अधिक रहती हैं। ऐसे में प्रदेश को हर साल 600 से 800 करोड़ रुपये तक की आय होने का अनुमान है। अगले 20 वर्षों में यह लाभ करीब 15 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

नकद राशि के बजाय बिजली लेने का मुख्यमंत्री ने लिया निर्णय

हिमाचल प्रदेश के महाधिवक्ता अनूप रतन ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को प्रदेश के लिए दिवाली का तोहफा बताया है। उन्होंने कहा कि बीबीएमबी में हिमाचल की हिस्सेदारी का मामला वर्ष 1996 से सर्वोच्च न्यायालय में लंबित था। पहले इस हिस्सेदारी के बदले प्रदेश को नकद राशि देने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा था। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस मामले में अलग रुख अपनाते हुए नकद भुगतान के बजाय बिजली देने की मांग रखी। सरकार का मानना था कि बिजली की बढ़ती मांग और बाजार में इसकी कीमत को देखते हुए बिजली के रूप में हिस्सेदारी लेना प्रदेश के लिए अधिक फायदेमंद रहेगा।

सर्दियों में बिजली बेचने से अधिक कमाई की उम्मीद

महाधिवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने बिजली मिलने की अवधि को लेकर भी विशेष ध्यान दिया। सरकार ने अक्टूबर से मार्च के बीच बिजली देने का पक्ष रखा, क्योंकि इन महीनों में प्रदेश में बिजली की मांग अधिक रहती है और खुले बाजार में भी इसकी कीमत ऊंची होती है। इससे हिमाचल को अपनी हिस्सेदारी की बिजली बेचकर बेहतर आय प्राप्त हो सकेगी। अनूप रतन के अनुसार यदि बिजली की औसत कीमत 10 रुपये प्रति यूनिट भी रहती है तो प्रदेश को हर साल करीब 600 करोड़ रुपये की आय हो सकती है। बाजार में कीमत 13 से 14 रुपये प्रति यूनिट तक पहुंचने पर यह लाभ 800 करोड़ रुपये या इससे अधिक हो सकता है। इस तरह 20 वर्षों में प्रदेश को करीब 15 हजार करोड़ रुपये तक का आर्थिक लाभ मिलने का अनुमान है।

बकाया बिजली भी तत्काल देने के आदेश

अनूप रतन ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पहले तैयार किए गए प्रस्ताव में हिमाचल के हितों के अनुरूप व्यवस्था नहीं थी। उसमें अलग-अलग दरों के आधार पर नकद भुगतान का प्रावधान था। मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था के स्थान पर बिजली के रूप में हिस्सेदारी देने की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने बीबीएमबी को हिमाचल की बिजली हिस्सेदारी तत्काल प्रभाव से जारी करने के आदेश दिए हैं। इसमें पिछली अवधि का बकाया भी शामिल है। उनके अनुसार हरियाणा का समर्थन मिलने से भी कानूनी मामले में हिमाचल का पक्ष मजबूत हुआ। अब सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम आदेश के बाद बीबीएमबी को प्रदेश की हिस्सेदारी की बिजली जारी करनी होगी। महाधिवक्ता ने इस उपलब्धि को राज्य सरकार की कानूनी पैरवी और मुख्यमंत्री के निर्णय का परिणाम बताते हुए कहा कि इससे हिमाचल को लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिलेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा