वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में शुरू हुई थी बीबीएमबी में हिमाचल के हक की लड़ाई : विक्रमादित्य सिंह
शिमला, 06 नवंबर (हि.स.)। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की कानूनी लड़ाई वर्ष 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने शुरू की थी। करीब तीन दशक बाद सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से प्रदेश को इस मामले में बड़ी सफलता मिली है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने शुक्रवार को शिमला में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस निर्णय से हिमाचल को अगले 20 वर्षों तक हर साल करीब 60 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। इससे प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 400 से 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक लाभ होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के कार्यकाल में इस मामले में निर्णायक सफलता मिली है।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत बीबीएमबी की परियोजनाओं में हिमाचल की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार बनता है। वर्ष 1996 में वीरभद्र सिंह सरकार ने इसके लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और सोनिया गांधी के सहयोग से प्रदेश ने अपना पक्ष मजबूती से रखा था। वर्ष 2011 में भी सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल की हिस्सेदारी के अधिकार को स्वीकार करते हुए इसके क्रियान्वयन के निर्देश दिए थे, लेकिन बकाया ऊर्जा लाभों का निर्धारण लंबित रहा। ताजा निर्णय से इस विवाद के समाधान का रास्ता साफ हुआ है।
उन्होंने कहा कि भाखड़ा-नंगल और पोंग बांध सहित ब्यास नदी पर बनी परियोजनाओं के कारण बिलासपुर समेत प्रदेश के कई क्षेत्रों के लोगों को विस्थापन झेलना पड़ा। अनेक परिवार राजस्थान और हरियाणा में बसाए गए, लेकिन उनके कई अधिकार अब भी लंबित हैं। सरकार इन परिवारों के हितों की पैरवी करेगी। चंडीगढ़ में हिमाचल की हिस्सेदारी और दूसरे अंतरराज्यीय मामलों को भी मजबूती से उठाया जाएगा।
लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि प्रदेश में 800 किलोमीटर सड़कों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 50 से 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। सड़क निर्माण के लिए बिटुमेन की आपूर्ति का मामला केंद्र के समक्ष उठाया गया है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर पर्याप्त आपूर्ति का आग्रह किया है। रामपुर, आनी, कुल्लू के ऊंचाई वाले क्षेत्रों और भरमौर में सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में लोक निर्माण और शहरी विकास विभाग के माध्यम से करीब 10 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाए गए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण में प्रदेश को करीब 3,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। इससे 1,700 किलोमीटर नई सड़कें बनाई जा सकेंगी। विभाग का प्रयास है कि स्वीकृति मिलने पर मार्च 2027 में निविदा प्रक्रिया शुरू की जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा