हिमाचल की धरोहरों के संरक्षण पर मोदी सरकार का बड़ा निवेश, 40 संरक्षित स्मारकों के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च : अनुराग सिंह ठाकुर
हमीरपुर, 03 अगस्त (हि.स.)। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा लोकसभा में पूछे गए अतारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय महत्व के घोषित 40 प्राचीन स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों एवं अवशेषों का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा नियमित रूप से किया जा रहा है। इन धरोहरों के संरक्षण, जीर्णोद्धार, रखरखाव, पर्यावरणीय विकास तथा आगंतुक सुविधाओं के विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने पिछले पांच वित्तीय वर्षों में लगभग 20 करोड़ रुपये व्यय किए हैं। यह कार्य राष्ट्रीय संरक्षण नीति-2014 के अनुरूप आधुनिक पथ, सूचना संकेतक तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास के साथ किया जा रहा है।
अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा संस्कृति मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरें केवल हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि पर्यटन, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल की ऐतिहासिक धरोहरों को राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान दिलाने के लिए उनके निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप इनके संरक्षण, सुरक्षा और विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हमीरपुर जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षित 40 स्मारकों में सुजानपुर स्थित भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध नरबदेश्वर मंदिर तथा टीहरा सुजानपुर का ऐतिहासिक कटोच पैलेस भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश के अन्य महत्वपूर्ण संरक्षित स्मारकों में बैजनाथ मंदिर, मसरूर के शैलकृत मंदिर, कांगड़ा किला, शिमला स्थित वाइस रीगल लॉज (राष्ट्रपति निवास), स्पीति के ताबो बौद्ध मठ, मनाली का हिडिंबा देवी मंदिर तथा चंबा के श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर समूह जैसे ऐतिहासिक स्थल भी निरंतर संरक्षण कार्यों के दायरे में हैं।
अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि एएसआई द्वारा इन धरोहरों की सुरक्षा के लिए नियमित सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। साथ ही समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण कर आवश्यक संरक्षण कार्यों को वार्षिक कार्ययोजना में शामिल किया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार स्थानीय समुदायों, विद्यार्थियों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर रही है।
संस्कृति मंत्रालय ने अपने उत्तर में बताया कि विश्व धरोहर सप्ताह तथा विश्व पर्यटन दिवस जैसे अवसरों पर हेरिटेज वॉक, प्रदर्शनी, व्याख्यान, निर्देशित भ्रमण और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से युवाओं और स्थानीय समाज को ऐतिहासिक धरोहरों से जोड़ने के साथ-साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विशाल राणा