वोटर लिस्ट से नाम हटाने का हिसाब दे केंद्र, दिल्ली रैली में जुटेंगे 10 लाख लोग : अलका लांबा

 


शिमला, 26 अक्टूबर (हि.स.)। मतदाता सूची से नाम हटाने और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ राजनीतिक अभियान तेज करने की तैयारी की है। अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने सोमवार को शिमला में कहा कि कांग्रेस का ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग पूरी होने तक जारी रहेगा। उन्होंने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया गठबंधन की महारैली में 10 लाख से अधिक लोगों के जुटने का दावा करते हुए हिमाचल प्रदेश की महिलाओं और आम लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की।

प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में पत्रकार वार्ता के दौरान अलका लांबा ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने का मुद्दा केवल राजनीतिक दलों के चुनावी हितों से जुड़ा नहीं है, यह नागरिकों के मताधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था में उनके भरोसे का सवाल है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को देशभर में उठाएगी। महारैली के लिए जारी पोस्टर में ‘चलो दिल्ली, वोट चोर गद्दी छोड़, लोकतंत्र बचाओ, देश बचाओ’ का नारा दिया गया है।

13 करोड़ मतदाताओं को लेकर केंद्र से सवाल

अलका लांबा ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के नाम पर 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर किए जाने का मामला गंभीर है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि जिन लोगों को कथित तौर पर घुसपैठिया बताकर सूची से बाहर किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है, वे भारत में कब आए थे। उन्होंने कहा कि यदि ये लोग वर्ष 2014 के बाद भारत आए हैं, तो उस समय से केंद्र में भाजपा की सरकार है। ऐसे में इस मामले की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से गरीबों, दलितों और आदिवासियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के पद पर बने रहने को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, मतदाता सूची से हटाए गए लोगों की संख्या, उनके नाम हटाने के कारणों और उन्हें घुसपैठिया बताए जाने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि पत्रकार वार्ता में प्रस्तुत नहीं की गई।

अलका लांबा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए उनके इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में मनमाने ढंग से बदलाव किए गए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने इस संबंध में 10 दिनों के भीतर कैबिनेट सचिव को 14 आपत्ति पत्र लिखे थे। उनके अनुसार इस घटनाक्रम से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से हटाए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश की जगह बनाए गए नए प्रावधानों से सरकार के प्रभाव को लेकर सवाल पैदा होते हैं। अलका लांबा ने मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित एकतरफा निर्णयों की समीक्षा की जाए और एसआईआर प्रक्रिया रद्द की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा