हिसार : हमें प्रकृति का दोहन नहीं बल्कि संरक्षण सिखाती भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं : कपिल खन्ना

 




गुरु जम्भेश्वर विवि. में राष्ट्रीय गौरव संस्थान

के संस्थान के सौजन्य हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी

विश्वविद्यालय में श्री अशोक सिंघल अध्ययन शोध

पीठ की भी हुई स्थापना

श्रीराम जन्म भूमि के कारसेवकों को किया गया सम्मानित

विश्व हिंदू परिषद् के राष्ट्रीय महामंत्री बजरंग

लाल बागड़ा रहे मुख्य वक्ता

हिसार, 05 जून (हि.स.)। राष्ट्रीय गौरव संस्थान

नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष कपिल खन्ना ने कहा है कि भारतीय ज्ञान एवं सांस्कृतिक

परंपराएं हमें प्रकृति का दोहन नहीं बल्कि संरक्षण सिखाती हैं। आज से 500 साल पहले

जब पाश्चात्य संस्कृति आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के नाम पर प्रकृति के दोहन के सिद्धांत

खोज रही थी, उसी समय हमारे देश में गुरु जंभेश्वर जी महाराज हमें प्रकृति संरक्षण के

सिद्धांतों और जरूरतों से अवगत करवा रहे थे जबकि उस समय आज की तरह का पर्यावरण संकट

नहीं था।

कपिल खन्ना शक्रवार को गुरु जम्भेश्वर विज्ञान

एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य पर राष्ट्रीय

गौरव संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में ‘राष्ट्र अभ्युदय में सांस्कृतिक और पर्यावरण

चेतना का समन्वय’ विषय आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को मुख्य अतिथि

के तौर पर संबोधित कर रहे थे। विश्वविद्यालय के डाॅ. भीमराव अंबेडकर पुस्कालय में

‘श्री अशोक सिंघल अध्ययन शोध पीठ’ की स्थापना भी की गई है। अशोक सिंघल अध्ययन शोध

पीठ की यह प्रथम संगोष्ठी थी।

कपिल खन्ना ने इस अवसर पर कहा कि अशोक सिंघल

के नाम पर स्थापित यह शोध पीठ विद्यार्थियों को आधुनिकता के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक

जड़ों से भी जुड़ना सिखाएगी। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल का अंतर्मन सनातन संस्कृति

के लिए धड़कता था। उन्होंने कहा कि रामजन्म भूमि के कारसेवकों का सम्मान करना इस कार्यक्रम

का सबसे पवित्र हिस्सा है। उन्होंने कारसेवकों को राष्ट्र का जीवंत नायक बताया।

बजरंग लाल बागड़ा ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें

सिखाती है कि जड़, चेतन और मानव सब भाई बहन हैं। हमारा दायित्व बनता है कि हम जो प्रकृति

से लें, उतना वापिस भी लौटाएं। उन्होंने अशोक सिंघल के जीवन के जुड़े पहलुओं को छुआ

तथा बताया कि श्रीराम जन्म भूमि आंदोलन के वे नायक थे। उन्होंने कारसेवकों के जज्बे,

समर्पण और बलिदान का जिक्र भी किया।

प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का भाव देती भारतीय

संस्कृति : प्रो. नरसी राम बिश्नोई

प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि भारतीय संस्कृति

में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की वैश्विक चुनौतियों के सभी सिद्धांत

हैं। भारतीय संस्कृति हमें प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व और संवेदनशीलता का भाव देती

है। उन्होंने कहा कि गुरु जंभेश्वर जी महाराज के सिद्धांत आज के विज्ञान एवं तकनीकी

युग में भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने अशोक सिंघल को भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्र

मूल्यों और सांस्कृतिक उत्थान की सोच वाला महान व्यक्तित्व बताया।

इस अवसर पर श्रीराम जन्म भूमि के कारसेवकों के

साथ-साथ राष्ट्रीय गौरव संस्थान के प्रांत उपाध्यक्ष मनोज लाकड़ा, महिला प्रांत अध्यक्ष

रेणू गुप्ता, दिल्ली प्रांत अध्यक्ष वेदप्रकाश तथा विश्व हिंदू परिषद् हरियाणा के प्रांत

मंत्री अनुराग कुलश्रेष्ठ को भी सम्मानित किया। कपिल खन्ना व बजरंग लाल बागड़ा ने गुरु

जंभेश्वर जी महाराज धार्मिक अध्ययन संस्थान परिसर में पौधारोपण किया तथा गुरु जंभेश्वर

जी महाराज की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर