हिसार : लुवास के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय स्तर की संवेदनशीलता कार्यशाला में की भागीदारी

 


हिसार, 21 मार्च (हि.स.)। लाला लाजपत राय पशु

चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के चार वैज्ञानिकों ने नई दिल्ली में आयोजित

एक दिवसीय संवेदनशीलता कार्यशाला में भाग लिया। केन्द्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग

की ओर से आयोजित इस कार्यशाला का विषय ‘मॉक ड्रिल्स में पहचानी गई कमियों को दूर करना’ था।

कार्यशाला का आयोजन एपी शिंदे सिम्पोजियम हॉल,

नैसकॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली में हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य ज़ूनोटिक रोगों की रोकथाम,

नियंत्रण तथा आपातकालीन परिस्थितियों में विभिन्न विभागों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया

तंत्र को मजबूत करना था। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन के अंतर्गत आयोजित किया

गया, जो ‘वन हेल्थ’ अवधारणा पर आधारित है।

कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) विनोद वर्मा के मार्गदर्शन

में लुवास से डॉ. राजेश, डॉ. विजय जाधव, डॉ. स्वाति दहिया तथा डॉ. मनेश कुमार ने इस

कार्यशाला में हिस्सा लिया। इस कार्यशाला में विभिन्न राज्य पशुपालन विभागों, निदान

प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों तथा रिमाउंट वेटरनरी कोर में कार्यरत पशु चिकित्सक

(वेटरिनेरियन) प्रतिभागी के रूप में शामिल हुए। विभिन्न सत्रों का संचालन ब्रिगेडियर

एमएम रामचंद्र, निदेशक, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट ने किया। उन्होंने तकनीकी

सत्रों का संयोजन एवं मॉडरेशन किया, जिससे चर्चाएं अधिक प्रभावी एवं केंद्रित

रहीं।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को ज़ूनोसिस

से संबंधित मॉक ड्रिल्स के डिजाइन, संचालन एवं मूल्यांकन के बारे में विस्तृत जानकारी

दी गई। एक प्रमुख सत्र में एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) महामारी के सिमुलेशन पर आधारित

टेबल-टॉप अभ्यास कराया गया, जिसमें विभिन्न विभागों की भूमिकाओं तथा 'वन हेल्थ' फ्रेमवर्क

के अंतर्गत समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया गया। एक अन्य सत्र में जैविक प्रयोगशाला के निकट उच्च

स्तरीय बैठक के दौरान जल-जनित रोग प्रकोप का सिमुलेशन अभ्यास किया गया, जिसमें आपातकालीन

प्रबंधन, विभागीय समन्वय, त्वरित निर्णय-निर्माण तथा प्रभावी संचार पर विशेष बल दिया

गया।

इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों को राज्य एवं केंद्र

स्तर पर वन हेल्थ गवर्नेंस फ्रेमवर्क की जानकारी प्रदान की गई, जो जैविक खतरों, बायोसिक्योरिटी

तथा संभावित जैव आतंकवाद से निपटने हेतु संरचित व्यवस्था सुनिश्चित करता है। लुवास

के वैज्ञानिकों ने बताया कि यह कार्यशाला अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रही। ब्रिगेडियर

एमएम रामचंद्र के संचालन से सत्रों में गहन चर्चा हुई, जिससे प्रतिभागियों की आपदा

प्रबंधन, रोग नियंत्रण तथा अंतर-विभागीय समन्वय संबंधी क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि

हुई। ऐसे प्रशिक्षण भविष्य में ज़ूनोटिक रोगों के प्रकोप को प्रभावी ढंग से रोकने एवं

सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर