हिसार : जन्म के बाद नवाजात पशुओं को पिलाएं मां का पहला दूध : डॉ. महाबीर
अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए पांच दिवसीय पशुपालन प्रशिक्षण कार्यक्रम
का आयोजन
हिसार, 20 जनवरी (हि.स.)। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय
के विस्तार शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत पशु विज्ञान केंद्र, सिरसा की ओर से अनुसूचित
जाति की महिलाओं के लिए भोड़िया खेड़ा गांव में पांच दिवसीय निशुल्क पशुपालन प्रशिक्षण
कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहयोग से विश्वविद्यालय
के कुलपति प्रो. डॉ. विनोद कुमार वर्मा के मार्गदर्शन एवं विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ.
गौतम के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति की महिलाओं को वैज्ञानिक
पद्धतियों के माध्यम से पशुपालन अपनाकर आत्मनिर्भर बनाना एवं उनकी आय में वृद्धि के
लिए उन्हें आधुनिक तकनीकों से अवगत कराना था। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विषय विशेषज्ञों
एवं वैज्ञानिकों डॉ. नीलेश सिंधु, डॉ. तरुण, डॉ. सुशील, डॉ. मान सिंह तथा डॉ. जय भगवान
ने व्याख्यान प्रस्तुत किए।इन व्याख्यानों में पशुओं के लिए संतुलित आहार निर्माण,
पशुओं की संक्रामक बीमारियां, ठनैला (मैस्टाइटिस) रोग की पहचान एवं रोकथाम, डी-वॉर्मिंग
(कृमिनाशक उपचार) तथा पशुओं के स्वास्थ्य एवं प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों
पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम का समन्वय पशु विज्ञान केंद्र, सिरसा के डॉ. महावीर चौधरी द्वारा
किया गया। डॉ. महावीर चौधरी ने नवजात पशु बच्चों की देखभाल के महत्व पर प्रकाश डालते
हुए बताया कि जन्म के तुरंत बाद उन्हें मां का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) अवश्य पिलाना
चाहिए। उन्होंने बताया कि प्लेसेंटा (जेर) गिरने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि
कोलोस्ट्रम नवजात पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका
निभाता ह। डॉ. महावीर चौधरी ने सभी उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम को
सफल बनाने में सहयोग देने के लिए सरपंच कौशल्या देवी, अनिल गढ़वाल एवं अन्य पंचायत
सदस्यों का विशेष रूप से धन्यवाद किया।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर