हिसार : अदालत ने निरस्त की ऑटो चालक विजेंद्र को दी गई एक साल के कठोर कारावास की सजा
हिसार, 31 जुलाई (हि.स.)। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश खत्री सौरभ की अदालत ने
10 साल पुराने सड़क हादसे के एक अपील केस में अहम फैसला सुनाते हुए हांसी की उप-मंडल
न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा ऑटो चालक विजेंद्र को दी गई एक साल के कठोर कारावास
की सजा को निरस्त कर दिया है।
एसीजे की अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बिना ड्राइविंग
लाइसेंस के वाहन चलाना भले ही मोटर वाहन अधिनियम के तहत कानूनन अपराध हो, लेकिन केवल
इस आधार पर दुर्घटना के लिए दोषी चालक अपनी आपराधिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।
हालांकि, अदालत ने ऑटो चालक की दोषसिद्धि को बरकरार रखा और केवल 1500 कुल जुर्माना
भरने का आदेश देकर उसे बरी किया।
आरोपी 56 वर्षीय ऑटो चालक पिछले 10 वर्षों से मुकदमा
झेल रहा था और परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य है, इसलिए जेल की सजा अनुचित मानी
गई। अदालत ने अपने फैसले में माना कि मुख्य सड़क पर या मोड़ पर वाहन मोड़ते समय चालक
का यह पहला कर्तव्य है कि वह रफ्तार धीमी करे और सामने से आ रहे वाहनों का ध्यान रखे।
यह था पूरा मामला
मामला 21 जुलाई 2016 का है। पीड़िता सीता दोपहर करीब दो बजे अपनी स्कूटी से
अपने बेटे दीपक को लेने जा रही थीं। जब वह हांसी के हुडा सेक्टर-6 के मोड़ (मकान नंबर
283-P के पास) पहुंचीं, तो सामने मोड से आए एक ऑटो रिक्शा के चालक ने तेज रफ्तार और
लापरवाही से उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। हादसे में महिला सड़क पर गिरकर बेहोश हो
गई। उन्हें गंभीर चोटों के कारण हिसार के जिंदल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां
उनके सिर में फ्रैक्चर, कॉलर बोन और हाथ में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। पुलिस ने 25 जुलाई
2016 को मामला दर्ज किया था।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर