हरियाणा में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मिलेगी मजबूती, 2295 करोड़ रुपये की परियोजनाएं तैयार
नाबार्ड के ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष से 2,180 करोड़ रुपये की ऋण सहायता का प्रस्ताव
चंडीगढ़, 21 सितंबर (हि.स.)। हरियाणा सरकार ने सिंचाई, सडक़ों, पेयजल आपूर्ति तथा भंडारण बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 2,295.27 करोड़ रुपये की ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार किए हैं। इनमें से 2,180.50 करोड़ रुपये की ऋण सहायता नाबार्ड के ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (आरआईडीएफ) के तहत प्रस्तावित है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सोमवार को एक बैठक में राज्य में नाबार्ड की सहायता से चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने तथा संबंधित विभागों द्वारा ऋण निकासी के दावे समय पर प्रस्तुत करने पर जोर दिया। वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार की प्राथमिकता वाली छह प्रमुख परियोजनाओं में सिंचाई, पेयजल, सडक़ और वेयरहाउसिंग बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण निवेश प्रस्तावित है।
नाबार्ड की मुख्य महाप्रबंधक निवेदिता तिवारी ने बताया कि नए प्रस्तावों में 315.36 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली सिंचाई परियोजना शामिल है, जिसके लिए 299.59 करोड़ रुपये की आरआईडीएफ सहायता प्रस्तावित है। इसके अलावा, सडक़ों के सुधार, चैड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण से संबंधित 57 परियोजनाओं की कुल लागत 495.71 करोड़ रुपये है, जिनके लिए 470.92 करोड़ रुपये की आरआईडीएफ सहायता प्रस्तावित है। दोनों प्रस्ताव आरआईडीएफ पोर्टल पर प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
नूंह और पलवल जिलों के पांच महाग्रामों-बिछोर, बिसरू, नई, सिंगार और पिंगवां को कवर करने वाली एक बड़ी ग्रामीण पेयजल परियोजना की कुल लागत 744.59 करोड़ रुपये है। इसमें 707.36 करोड़ रुपये की आरआईडीएफ सहायता प्रस्तावित है। इस परियोजना के तहत यमुना के बाढ़ क्षेत्र में रैनी वैल तथा संबंधित बुनियादी ढांचे का निर्माण करके जल स्रोतों की क्षमता बढ़ाने की योजना है। आरआईडीएफ के तहत अपेक्षित मानक आवंटन को देखते हुए परियोजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है। इसके प्रथम चरण के लिए 299 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता संबंधी प्रस्ताव को हरियाणा वित्त विभाग द्वारा स्वीकृति दी जानी है।
एक अन्य प्रस्ताव के तहत हरियाणा राज्य भंडारण निगम (एचएसडब्ल्यूसी) के पास उपलब्ध खाली भूमि पर 2,30,508 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता वाले गोदामों के निर्माण तथा निचले क्षेत्रों में स्थित परिसरों में 1,23,664 मीट्रिक टन गोदाम क्षमता के पुनर्निर्माण के लिए 290.74 करोड़ रुपये का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। इसमें 276.20 करोड़ रुपये का ऋण घटक प्रस्तावित है। वित्त विभाग ने इस परियोजना को नाबार्ड की अवसंरचना विकास सहायता (एनआईडीए) योजना के तहत वित्तपोषण के लिए भी विचार किए जाने की स्वीकृति दी है।
मुख्य सचिव ने सोनीपत के गन्नौर स्थित इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट (आईआईएचएम) की भी समीक्षा की। इसके लिए नाबार्ड ने एनआईडीए के तहत 1,850 करोड़ रुपये का सावधि ऋण स्वीकृत किया है। परियोजना का वित्तीय चरणबद्ध क्रियान्वयन वर्ष 2025-26 से 2027-28 तक तीन वर्षों के लिए निर्धारित है। वर्ष 2025-26 में 740 करोड़ रुपये के निर्धारित चरण के मुकाबले 451 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिससे 289 करोड़ रुपये का वितरण अंतर रहा। वर्ष 2026-27 के लिए चरणबद्ध वितरण 740 करोड़ रुपये है। एचआईएचएमसीएल को परियोजना की भौतिक प्रगति के अनुरूप ऋण निकासी के दावे प्रस्तुत करने को कहा गया, ताकि परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जा सके।
बैठक में विभिन्न विभागों के अंतर्गत चल रही आरआईडीएफ परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। वित्तीय चरणबद्धता के अनुसार 17 अगस्त, 2026 तक आरआईडीएफ की 28वीं से 31वीं किस्त के तहत चल रही परियोजनाओं में 962.81 करोड़ रुपये के वितरण अंतर की जानकारी दी गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा