सोनीपत: खेल विश्वविद्यालय के कुलपति ने दिया इस्तीफा,समारोह में दी विदाई

 


-विश्वविद्यालय देश का दूसरा सबसे

बड़ा संस्थान बनकर उभरा

सोनीपत, 30 अक्टूबर (हि.स.)। हरियाणा

खेल विश्वविद्यालय, राई के कुलपति अशोक कुमार के सम्मान में विश्वविद्यालय परिसर में

शुक्रवार को विदाई समारोह आयोजित किया गया। इसमें विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों,

प्रशिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए

उनके कार्यकाल के योगदान को याद किया।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में एक केस के बाद अशोक कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया ।आज आयोजित समारोह

की शुरुआत एक सहायक प्रोफेसर द्वारा विश्वविद्यालय में अपने अनुभव साझा करने से हुई।

उन्होंने सहायक प्रोफेसर पदों पर हुई निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया का उल्लेख

करते हुए कुलपति के नेतृत्व और कार्यशैली की सराहना की। विश्वविद्यालय के अधिकारियों

ने उन्हें पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। खेल कोचिंग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

के विद्यार्थियों ने भी उनके मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार जताया। अशोक कुमार के

कार्यकाल में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। इनमें मिशन ओलंपिक्स

2036 सम्मेलन का आयोजन, भारतीय विश्वविद्यालय संघ से संबद्धता, विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों

को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता और राष्ट्रीय खेल संस्थान की समकक्षता प्राप्त

करना शामिल है। शारीरिक शिक्षा एवं खेल के क्षेत्र में विद्यार्थी संख्या के आधार पर

विश्वविद्यालय देश का दूसरा सबसे बड़ा संस्थान बनकर उभरा। उनके कार्यकाल में विश्वविद्यालय

में 30 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

वक्ताओं

ने बताया कि अशोक कुमार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली से तकनीकी शिक्षा प्राप्त

की और भारतीय पुलिस सेवा में अपनी सेवाएं दीं। वह उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक पद

से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने खेल विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी

संभाली। उनके प्रशासनिक और शैक्षणिक अनुभव से विश्वविद्यालय के विकास को दिशा मिली।

अपने

संबोधन में अशोक कुमार ने सभी अधिकारियों, शिक्षकों, प्रशिक्षकों और कर्मचारियों का

आभार जताया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को सिखाने के साथ उन्होंने

स्वयं भी बहुत कुछ सीखा है। हरियाणा सरकार ने उन्हें इस संस्थान की कार्यशैली समझने

और नई व्यवस्था का हिस्सा बनने का अवसर दिया, जिसके लिए वह आभारी हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र शर्मा परवाना