सोनीपत: कोर्ट ने मारपीट, छेड़छाड़ व धमकी के आरोपी को बरी किया

 


सोनीपत, 09 अक्टूबर (हि.स.)। सोनीपत

में मारपीट, महिला से छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने के करीब साढ़े सात साल

पुराने मामले में स्थानीय अदालत ने शुक्रवार काे आरोपी को बरी कर दिया। मामले में अहम बात यह रही

कि शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी अदालत में पुलिस की प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों से

मुकर गए। दोनों ने कहा कि पुलिस ने उनसे सादे कागजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान

लिए थे। मुख्य गवाहों के आरोपों की पुष्टि नहीं करने पर अदालत ने आरोपी को संदेह का

लाभ देते हुए शुक्रवार को बरी कर दिया।

न्यायिक

मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी साक्षी गुप्ता की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। मामला सोनीपत

शहर थाना में 18 जनवरी 2019 को दर्ज प्राथमिकी संख्या 27 से जुड़ा था। शिकायत के मुताबिक,

16 जनवरी 2019 की सुबह करीब नौ से दस बजे आरोपी नीतू शराब के नशे में शिकायतकर्ता सोनू

के घर के पास पहुंचा और गाली-गलौज करने लगा। सोनू ने विरोध किया तो आरोपी ने उसके साथ

मारपीट की। साथ ही उसकी पत्नी से छेड़छाड़ और बदसलूकी करने का आरोप लगाया गया था।

शिकायत

के अनुसार, पड़ोसियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। इसके बाद आरोपी पुलिस में शिकायत

देने पर गोली मारने की धमकी देते हुए चला गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज

कर अदालत में आरोपपत्र पेश किया था। 6 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष

ने तीन मुख्य गवाह पेश किए। इनमें शिकायतकर्ता सोनू, उसकी पत्नी और जांच अधिकारी एएसआई

राकेश शामिल थे। सोनू और उसकी पत्नी ने अदालत में अभियोजन पक्ष के आरोपों का समर्थन

नहीं किया। दोनों ने पुलिस को बयान देने से इनकार करते हुए कहा कि उनसे सादे कागजों

पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए गए थे। सरकारी वकील ने दोनों से जिरह की, लेकिन

आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया।

सात

पन्नों के फैसले में अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब

मुख्य गवाह ही आरोपों का समर्थन नहीं करते और दोषसिद्धि की संभावना नहीं रहती, तो केवल

औपचारिकता पूरी करने के लिए मुकदमा आगे बढ़ाना उचित नहीं है। अदालत ने यह कहा कि पक्षों

के बीच समझौता होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन फैसला अनुमानों के

बजाय रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के आधार पर किया जाता है। आरोपी के खिलाफ ठोस और निर्णायक

सबूत नहीं मिलने पर उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र शर्मा परवाना