सोनीपत कोर्ट का फैसला: फर्जी प्रमाण पत्र के आरोपी को पौधे लगाकर करनी होगी दो साल देखभाल
सोनीपत, 29 अक्टूबर (हि.स.)। सोनीपत
में फर्जी ओपन स्कूल बोर्ड का दसवीं कक्षा का प्रमाण पत्र जमा कर आगे की कक्षा में
दाखिला लेने के करीब चार साल पुराने मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आकाश को नियमित
जमानत दे दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुभाष चंद्र सिरोही की अदालत ने आरोपी को
पांच स्वदेशी पौधे लगाकर दो साल तक उनकी देखभाल करने की शर्त रखी है। पौधे लगाने के
प्रमाण के तौर पर अगली सुनवाई से पहले तस्वीरें भी अदालत में जमा करानी होंगी।
यह मामला
बरोदा थाने में 10 अक्टूबर 2022 को दर्ज किया गया था। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड,
भिवानी के सचिव के 24 मार्च 2022 के पत्र के आधार पर तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
निकिता खट्टर ने मामले की जांच की थी। जांच में सामने आया था कि कोविड-19 महामारी के
दौरान 2021 में बोर्ड परीक्षाएं नहीं हुई थीं। सरकार की नीति के अनुसार परिणाम घोषित
किए जाने थे। इसी दौरान दूसरे राज्यों और ओपन बोर्ड से दसवीं पास कर दाखिला लेने वाले
विद्यार्थियों के दस्तावेजों की जांच में हरियाणा काउंसिल ऑफ ओपन स्कूलिंग नामक कथित
फर्जी संस्थान के प्रमाण पत्र सामने आए थे।
गोहाना क्षेत्र के गांव छिछड़ाना निवासी
26 वर्षीय आकाश पर ऐसा प्रमाण पत्र जमा कर दाखिला लेने का आरोप है। बचाव
पक्ष के अधिवक्ता विकास कुंडू ने अदालत में दलील दी कि आकाश निर्दोष है और खुद धोखाधड़ी
का शिकार हुआ है। पुलिस का नोटिस मिलने पर वह जांच में शामिल हुआ और उसने हलफनामा व
संबंधित दस्तावेज सौंपे। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं
है और वह 20 सितंबर 2026 से न्यायिक हिरासत में है।
सरकारी
पक्ष की ओर से लोक अभियोजक रोशनी और एएसआई कृष्ण ने जमानत का विरोध करते हुए आरोपों
को गंभीर बताया। हालांकि, जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि जांच पूरी हो चुकी है
और एक सप्ताह में आरोपपत्र दाखिल कर दिया जाएगा। अदालत
ने माना कि आरोपी से अब कोई बरामदगी नहीं होनी है, वह जांच में शामिल हुआ और उसका पुराना
आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। इन तथ्यों के आधार पर पहली नियमित जमानत याचिका मंजूर कर
दी गई।
आरोपी को सार्वजनिक स्थान पर पीपल, नीम या बरगद जैसे पांच स्वदेशी पौधे लगाने,
दो साल तक उनकी देखभाल करने और अगली सुनवाई से पहले तस्वीरें जमा कराने का आदेश दिया
गया है। जमानत की अन्य शर्तें पूरी होने पर उसे रिहा करने का आदेश दिया गया। आरोपी
को अगली सुनवाई से पहले पौधे लगाने के प्रमाण के रूप में तस्वीरें संबंधित कोर्ट में
जमा करानी होंगी। कोर्ट ने संबंधित इलाका या ड्यूटी मजिस्ट्रेट की संतुष्टि के अनुसार
बेल बॉन्ड प्रस्तुत करने पर आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / नरेंद्र शर्मा परवाना