समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस की याचिका खारिज करे एचईआरसी
विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में कानूनी, तकनीकी और वित्तीय कमियों का जिक्र
गुरुग्राम-नूंह के 42 प्रतिशत से अधिक राजस्व पर असर की आशंका
चंडीगढ़, 19 सितंबर (हि.स.)। इलेक्ट्रिसिटी एंप्लाइज फेडरेशन आफ इंडिया (ईईएफआई) ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) से गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज करने की मांग की है। फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव सुदीप दत्ता और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा व सुरेश राठी ने कहा कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में प्रस्तावित लाइसेंस को लेकर कानूनी, तकनीकी, वित्तीय और उपभोक्ता हितों से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। संगठन ने इन आपत्तियों के साथ आयोग को रिपोर्ट भेजकर याचिका रद करने की मांग की है।
सुभाष लांबा ने कहा कि केवल कागजों पर प्रस्तावित नेटवर्क और भविष्य की योजनाओं के आधार पर समानांतर वितरण लाइसेंस नहीं दिया जाना चाहिए। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के अनुसार प्रस्तावित कंपनी करीब 4,716.73 करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का 84 प्रतिशत तीसरे से पांचवें वर्ष में खर्च करने की योजना बना रही है। गुरुग्राम शहर में निवेश को दो वर्ष तक टालने का मुद्दा भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
सुदीप दत्ता और सुरेश राठी ने कहा कि उपभोक्ताओं के एक लाइसेंसधारी से दूसरे के पास जाने के लिए राज्य में कोई अधिसूचित माइग्रेशन फ्रेमवर्क नहीं है। रिपोर्ट में माना गया है कि प्रस्तावित माइग्रेशन प्रोटोकाल डीएचबीवीएन को बाध्य नहीं कर सकता। बकाया राशि, फ्यूल सरचार्ज एडजेस्टमेंट, सुरक्षा जमा और मीटरों के हस्तांतरण जैसे मुद्दों का भी स्पष्ट समाधान नहीं है।
सुभाष लांबा के अनुसार गुरुग्राम और नूंह डीएचबीवीएन के 42 प्रतिशत से अधिक राजस्व से जुड़े हैं। अधिक राजस्व वाले उपभोक्ताओं के स्थानांतरण से डीएचबीवीएन पर ईंधन अधिभार समायोजन और दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों की स्थिर लागत का भार शेष उपभोक्ताओं पर पडऩे की आशंका है। उन्होंने कहा कि बिजली वितरण सार्वजनिक दायित्व वाली सेवा है। इसलिए उपभोक्ता हित, सार्वभौमिक सेवा दायित्व और वितरण व्यवस्था की वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखना जरूरी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा