कैथल: साढे चार करोड़ से दूर होगी महाभारतकालीन सूर्यकुंड की बदहाली

 


कैथल, 28 मई (हि.स.)। शहर के माता गेट स्थित ऐतिहासिक सूर्यकुंड सरोवर की बदहाल स्थिति अब जल्द बदल सकती है। गुरुवार को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की टीम ने स्थल का दौरा कर जीर्णोद्धार की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरोवर और उससे जुड़े प्राचीन कुंडों को संवारने के लिए करीब साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंगल के नेतृत्व में टीम ने सूर्यकुंड सरोवर और नवग्रह कुंडों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सरोवर की टूटी घाट, जर्जर दीवारें और सूखे पड़े जलस्रोत को लेकर चिंता जताई गई। योजना के तहत घाटों की मरम्मत, पिचिंग, दीवारों का निर्माण, लाइटिंग और सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

लोक निर्माण विभाग द्वारा इसका विस्तृत एस्टीमेट तैयार किया जाएगा, जिसे मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि मंजूरी मिलते ही इस साल काम शुरू होने की उम्मीद है। महाभारत काल से जुड़ा सूर्यकुंड मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हरियाणा ही नहीं, बल्कि देश भर से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। विशेष अवसरों पर यहां मेले भी लगते हैं, लेकिन पानी की कमी और रखरखाव के अभाव में सरोवर की स्थिति लगातार खराब होती गई।

इतिहासकारों के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद भूमि शुद्धि के लिए कैथल में नवग्रह कुंडों की स्थापना की गई थी। सूर्यकुंड इसके केंद्र में स्थित है, जबकि शनि, गुरु, बुध सहित अन्य कुंड शहर के अलग-अलग हिस्सों में बनाए गए थे। वर्तमान में कुछ कुंड ही अस्तित्व में हैं, जबकि कई कुंड अतिक्रमण और कालोनियों के कारण समाप्त हो चुके हैं। उपेंद्र सिंगल ने बताया कि प्राचीन धरोहरों को संरक्षित करने के लिए व्यापक योजना बनाई जा रही है। जीर्णोद्धार के बाद न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि शहर की सुंदरता और पर्यटन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे