कैथल : बाबा राजपुरी डेरे में साधु की हत्या, मुख्य महंत पर हत्या का आरोप
कैथल, 02 सितंबर (हि.स.) गांव बाबा लदाना स्थित ऐतिहासिक बाबा राजपुरी डेरे में बुधवार को एक साधु की हत्या से हड़कंप मच गया। डेरे के विश्राम गृह में साधु का शव पड़ा मिला। उसके शरीर पर चोट के निशान बताए गए हैं, जबकि सिर और दाढ़ी के बाल भी उखड़े मिले। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अनुयायी और ग्रामीण डेरे में पहुंच गए। उन्होंने मुख्य महंत पर साधु की पीट-पीटकर हत्या करने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कैथल पुलिस की सीआईए, एंटी व्हीकल थेफ्ट स्टाफ और सदर थाना की टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने डेरे के मुख्य महंत दूजपुरी सहित कुछ अन्य साधुओं को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार मृतक साधु की पहचान शिव शंकर पुरी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह करीब तीन महीने पहले उत्तर प्रदेश से बाबा राजपुरी डेरे में आया था और वर्तमान में मुख्य महंत दूजपुरी के पास रह रहा था। बुधवार सुबह ग्रामीण पूजा-पाठ के लिए डेरे में पहुंचे तो उन्होंने विश्राम गृह में शिव शंकर पुरी को मृत अवस्था में देखा। इसके बाद घटना की जानकारी अन्य अनुयायियों और पुलिस को दी गई।
अनुयायियों ने आरोप लगाया कि शिव शंकर पुरी को पहले डेरे में ही रस्सियों और जंजीरों से बांधा गया और इसके बाद उसकी बेरहमी से पिटाई की गई। आरोप है कि मारपीट के दौरान उसके सिर और दाढ़ी के बाल तक उखाड़ दिए गए। अनुयायियों और ग्रामीणों ने मुख्य महंत दूजपुरी पर हत्या का आरोप लगाते हुए मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।
सदर थाना प्रभारी कुलदीप सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि शिव शंकर पुरी और मुख्य महंत दूजपुरी के बीच सिगरेट उठाने को लेकर विवाद हुआ था। बताया गया कि शिव शंकर पुरी ने महंत की सिगरेट उठा ली थी, जिसके बाद दोनों के बीच कहासुनी और विवाद हुआ। पुलिस इसी विवाद को घटना की कड़ी से जोड़कर भी जांच कर रही है। शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद मौत के वास्तविक कारणों की स्थिति और स्पष्ट होगी।
400 साल पुराना माना जाता है बाबा राजपुरी डेरा
गांव बाबा लदाना स्थित बाबा राजपुरी डेरा कैथल ही नहीं, बल्कि देशभर में धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार इस डेरे का इतिहास करीब 400 वर्ष पुराना है। मान्यता है कि बाबा राजपुरी का जन्म इसी क्षेत्र में हुआ था और बचपन से ही वह आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। बाद में उन्होंने इसी स्थान पर साधना की और बाबा राजपुरी के नाम से प्रसिद्ध हुए।
डेरे का सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संबंध महंत तोतापुरी महाराज से माना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार तोतापुरी ने बाबा राजपुरी डेरे में साधना और प्रशिक्षण प्राप्त किया तथा बाद में वर्ष 1858 में यहां के महंत बने। वह इस डेरे के सातवें महंत रहे। तोतापुरी महाराज का नाम आध्यात्मिक गुरु रामकृष्ण परमहंस से जुड़ा है। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस को संन्यास और अद्वैत वेदांत की शिक्षा दी थी। रामकृष्ण परमहंस आगे चलकर स्वामी विवेकानंद के गुरु बने। बाबा लदाना स्थित डेरे में आज भी महंत तोतापुरी की समाधि होने के कारण इसका आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व काफी बढ़ जाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे