कैथल : दुकानाें के विवाद काे लेकर गुहला के विधायक ने एसडीएम को थमाया झुनझुना
कैथल, 19 जनवरी (हि.स.)। गुहला के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय परिसर में निर्माणाधीन दुकानों के
कथित अवैध निर्माण को लेकर उठा विवाद अब प्रशासनिक, राजनीतिक और न्यायिक मोर्चे पर पहुंच गया है। एसडीएम पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का आराेप लगाते हुए धरना दे रहे लाेगाें के साथ कांग्रेसी विधायक देवेंद्र हंस ने एसडीएम कैप्टन प्रमेश सिंह काे बच्चाें के खेलने का झुनझुना थमा दिया। मामला अब गुहला कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने पंचायत अधिकारी को पेश होने के आदेश जारी किए हैं। कानूनी जानकारों का कहना है कि पेशी के दौरान भूमि स्वामित्व, रेगुलेशन और निर्माण अनुमति से जुड़े सभी दस्तावेज कोर्ट के समक्ष रखे जाएंगे।
एसडीएम ने विधायक को दोपहर दाे बजे तक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन तय समय सीमा के बाद न तो निर्माण कार्य पर प्रभावी रोक लगी और न ही कोई ठोस प्रशासनिक आदेश सामने आया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय भी निर्माण गतिविधियां जारी रहीं।
एसडीएम ने कहा कि पूरा मामला बीडीपीओ कार्यालय से जुड़ा है और उनके अधिकार क्षेत्र में केवल निर्माण कार्य की जांच करना था, जो उन्होंने की और निर्माण को सही पाया। उन्होंने कहा कि दुकानों को खाली करवाना, किराया बढ़ाना या रेगुलेशन लागू करना पंचायत अधिकारी का विषय है।
एसडीएम ने बताया कि संबंधित भूमि राज्य सरकार की है और 2023 की अधिसूचना के अनुसार बीडीपीओ इसे अपने नाम दर्ज करवा सकता है। हालांकि, जब तक भूमि राजस्व रिकॉर्ड में बीडीपीओ के नाम दर्ज नहीं होती, तब तक उस पर रेगुलेशन पास करना, दुकानों का क्षेत्रफल बढ़ाना या स्थायी निर्माण कराना कानूनन अवैध माना जाता है। इसी आधार पर ब्लॉक समिति द्वारा पारित रेगुलेशन की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।
भ्रष्टाचार के आरोपों पर एसडीएम ने कहा कि आरोप कोई भी किसी पर लगा सकता है। रजिस्ट्री में पैसे लेने से जुड़े पुराने आरोपों पर उन्होंने सफाई दी कि उस समय एक्साइज विभाग का पत्र प्रयोग किया गया था और बाद में दस्तावेज पूरे होने पर रजिस्ट्री कर दी गई थी।
शाम काे अपना आधिकारिक पक्ष जारी करते हुए एसडीएम कैप्टन प्रमेश सिंह ने कहा कि दुकान निर्माण मामले में खंड विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा कोई भी अनियमितता नहीं बरती गई है। उन्होंने बताया कि अक्तूबर और दिसंबर में शिकायतकर्ताओं द्वारा अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए निर्माण कार्य रोकने की मांग की गई थी, जिस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए पुलिस विभाग को कार्य रुकवाने के आदेश दिए गए थे। विधायक देवेंद्र हंस ने कहा कि अब कार्रवाई वे करवा कर रहेंगे और जरूरत पड़ी तो हाई कोर्ट तक जाएंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे