कैथल: डंकी रूट से अमेरिका गए छह युवक डिपोर्ट
कैथल, 09 जनवरी (हि.स.)।
किसी ने जमीन बेची तो किसी ने अपने बच्चे को डंकी के रास्ते अमेरिका भेजने के लिए पत्नी के गहने तक बेच डाले। कहीं 30 लाख रुपये खर्च हुए तो कहीं यह आंकड़ा 50 लाख रुपये तक पहुंच गया। कैथल में एक के बाद एक डिपोर्ट हो रहे युवाओं के परिवार सदमे में हैं। खर्च की गई धनराशि की क्षतिपूर्ति किसी भी सूरत में संभव नहीं है और वापस भेजे जाने के झटके से परिवार के सदस्य ही नहीं, बल्कि खुद युवा भी बातचीत करने को तैयार नहीं हैं।अमेरिका में बेहतर भविष्य के सपने संजोकर घर से निकले कैथल जिले के छह युवा अब वही सपना टूटने का दर्द लेकर अपने गांव लौट आए हैं। डिपोर्ट होकर लौटे इन युवाओं की कहानियां सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की पीड़ा बयां करती हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए जमीन, जेवर और जीवन भर की जमा पूंजी तक दांव पर लगा दी। दिल्ली हवाई अड्डे पर अमेरिका से डिपोर्ट किए गए युवाओं के जत्थे में हरियाणा के 33 युवा शामिल थे। प्रशासन ने इस बार पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा। कैथल जिले के भी छह युवा इस दल में शामिल थे, जो अब अपने गांव पहुंच चुके हैं। इनमें गांव खेड़ी रायवाली के संजीव कुमार, सिसमौर के गुरदेव, सौंगल गांव के साहिल, धेरडू सज्जन, ढांड के सोहन लाल और अमित कुमार शामिल हैं। सौंगल के साहिल और ढांड के सोहन लाल से जब पूरे घटनाक्रम को लेकर बातचीत करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। खेड़ी रायवाली निवासी संजीव कुमार तीन साल पहले अपनी पत्नी के साथ कनाडा गया था। चार माह पहले ही दोनों ने डंकी रूट के जरिए अमेरिका का रुख किया, लेकिन वहां पकड़े गए। संजीव की पत्नी को तुरंत डिपोर्ट कर दिया गया, जबकि संजीव को चार महीने तक डिटेंशन कैंप में रहना पड़ा। बाद में उसे कैलिफोर्निया से भारत भेज दिया गया।
डिपोर्ट होकर लौटे युवाओं ने डिटेंशन सेंटर के हालात भी साझा किए। एक युवक के अनुसार वहां खाने-पीने की स्थिति बेहद खराब है। ज्यादातर समय चावल और ब्रेड ही दी जाती है। चपाती सप्ताह में एक-दो बार मिलती है। जो युवा नॉनवेज नहीं खाते, उनके लिए वहां रहना और भी कठिन हो जाता है।
युवाओं का कहना है कि अमेरिका में अब डंकी रूट से गए युवाओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई हो रही है। पकड़ में आते ही बिना किसी लंबी सुनवाई के सीधे डिपोर्ट कर दिया जाता है। एक युवक ने बताया कि उसने एक एकड़ जमीन बेचकर करीब 40 लाख रुपये एजेंट को दिए थे। डंकी रूट से अमेरिका पहुंचा, लेकिन कुछ ही समय में पकड़ लिया गया। महीनों तक डिटेंशन सेंटर में रखने के बाद उसे भारत भेज दिया गया। परिवार की हालत भी बेहद खराब है। घर की महिलाओं की आंखों में आंसू हैं। एक महिला ने कहा, “उसी जमीन पर मेहनत करके दो वक्त की रोटी खा लेते, अब वह भी नहीं रही।जिला पुलिस को नहीं मिल रही सूचनाफरवरी 2025 से अमेरिका से युवाओं के डिपोर्ट होने का सिलसिला शुरू हुआ था। कैथल जिले में अब तक करीब 46 युवा डिपोर्ट हो चुके हैं। शुरुआत में युवाओं के डिपोर्ट होने की सूचना जिला पुलिस को दी जाती थी, लेकिन अब पुलिस के पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं पहुंच रही है। पहले युवाओं को जिला पुलिस लाइन लाया जाता था और वहीं से परिवार के सुपुर्द किया जाता था, लेकिन अब सीधे दिल्ली हवाई अड्डे से ही युवा अपने परिवार या रिश्तेदारों के पास चले जाते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे