एसआईआर में लापरवाही : कैथल में चार बीएलओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश
कैथल, 01 जुलाई (हि.स.)। भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) अभियान में लापरवाही बरतने वाले चार बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के खिलाफ कैथल जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गुहला (एससी) विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ)-सह-उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) ने संबंधित पुलिस थानों को पत्र भेजकर चारों बीएलओ के विरुद्ध जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-32 तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। निर्वाचन कार्य में लापरवाही को लेकर जिले में इस तरह की कार्रवाई को गंभीर माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार भारत निर्वाचन आयोग ने 15 जून से पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत प्रत्येक बूथ पर मतदाता सूची का घर-घर जाकर सत्यापन, नए पात्र मतदाताओं का पंजीकरण, मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं का सत्यापन और मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) के डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है।
आयोग ने इस अभियान को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सभी बीएलओ को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे तथा नियमित रूप से कार्य की मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
जिला प्रशासन के अनुसार अभियान के दौरान लगातार समीक्षा करने पर पाया गया कि गुहला विधानसभा क्षेत्र के चार बीएलओ अपने कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं कर रहे थे। 30 जून को दोपहर दो बजे तक की समीक्षा में सामने आया कि इन अधिकारियों ने अपने-अपने मतदान केंद्रों पर ईपीआईसी डिजिटाइजेशन का कार्य 20 प्रतिशत से भी कम पूरा किया था। यह स्थिति तब रही, जब उन्हें कई बार दूरभाष पर कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे और लिखित नोटिस जारी कर भी प्रगति सुधारने के लिए कहा गया था।
इसके बावजूद संबंधित बीएलओ द्वारा बार-बार निर्देश दिए जाने के बाद भी कार्य में सुधार नहीं किया गया, जिसे सरकारी दायित्वों के प्रति लापरवाही और उदासीनता माना गया है। इसी आधार पर मतदान केंद्र संख्या-81 (भागल) के बीएलओ कर्म सिंह, मतदान केंद्र संख्या-103 (अगोंध) के नरेंद्र पाल, मतदान केंद्र संख्या-170 (सीवन) के अनिल कुमार तथा मतदान केंद्र संख्या-191 (लैंडर कीमा) के राजेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की गई है।
थाना प्रभारी गुहला और थाना प्रभारी सीवन को भेजे गए पत्र में निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-32 एवं अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत नियमानुसार मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए तथा इसकी सूचना निर्वाचन कार्यालय को भी भेजी जाए।
निर्वाचन अधिकारी का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि इस कार्य में किसी स्तर पर लापरवाही बरती जाती है, तो इसका सीधा असर मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर पड़ सकता है। यही कारण है कि निर्वाचन आयोग ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढिलाई के पक्ष में नहीं है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज अत्रे