हिसार : तनाव के कारक नियंत्रण में नहीं, स्वयं को नियंत्रित करके कर सकते तनाव को नियंत्रित : प्रो. उर्मी नंदा विश्वास

 


‘तनाव प्रबंधन’ विषय पर विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन

हिसार, 20 फरवरी

(हि.स.)। गुरु जम्भेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर काउंसलिंग

एंड वैल-बींग के सौजन्य से ‘तनाव प्रबंधन’ विषय पर विशेष व्याख्यान कार्यक्रम

का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग की

अध्यक्षा प्रो. उर्मी नंदा विश्वास मुख्य वक्ता रही जबकि अध्यक्षता सेंटर फॉर काउंसलिंग

एंड वैल-बींग के निदेशक प्रो. संदीप राणा ने की।

मुख्य वक्ता प्रो.

उर्मी नंदा विश्वास ने शुक्रवार काे अपने संबोधन में कहा कि तनाव के कारक तो आपके नियंत्रण में नहीं

हैं, लेकिन आप स्वयं को नियंत्रित करके तनाव को नियंत्रित कर सकते हैं। तनाव हमेशा

खराब नहीं होता। हमें समझना है कि आखिर तनाव होता कैसे है। कई बार तनाव एक सर्वाइवल

मैकेनिज्म भी होता है। ज्यादातर बार यह बिना वजह के भय के कारण होता है। काल्पनिक भय

तनाव को जन्म देकर हमारे शरीर, मन और स्वास्थ्य से संबंधित बहुत सी बिमारियां पैदा

करता है। खुद की बजाय अगर आप लोगों के मतों

को महत्व देंगे, तो तनाव निश्चित तौर पर बढ़ेगा।

प्रो. उर्मी नंदा

ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को समझाया कि तनाव को पैदा करने वाले हार्मोन किस

प्रकार रिलीज होते हैं और तनाव के लक्षण क्या होते हैं। उन्होंने कहा कि तनाव सीधे

हमारी प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है तथा हमारे आत्मविश्वास व ऊर्जा को भारी क्षति

पहुंचाता है। तनाव प्रबंधन कहीं बाहर नहीं, अपने खुद में ही है। उन्होंने कहा कि नींद

की गुणवत्ता तनाव प्रबंधन में मददगार रहती है। हमें एक समय पर एक ही काम पर ध्यान देकर

उद्देश्यपूर्ण लक्ष्यों की प्राप्त करने के लिए दिनचर्या का निर्धारण करना चाहिए। प्रो.

उर्मी नंदा ने कहा कि वर्तमान दौर में संतुलित जीवन शैली अत्यंत आवश्यक है। प्रकृति के साथ समय बिताकर भी तनाव से दूर रहा जा

सकता है।

निदेशक प्रो. संदीप

राणा ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि मन की स्थिति को मजबूत करके ही खुद को बेहतर

किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी खुद की ताकत, कमजोरियों

और प्राथमिकताओं को समझें व जाने। उन्हीं के हिसाब से खुद का प्रबंधन करें। अपने बारे

में जागरूक होना ही तनाव से बचने का सबसे बड़ा उपाय है। डा. तरूणा ने धन्यवाद किया। व्याख्यान कार्यक्रम में 200 से अधिक विद्यार्थियों

ने भाग लिया। इस अवसर पर केन्द्र के उपनिदेशक प्रो. राकेश बहमनी, प्रो. मंजू, डा. गौरव,

डा. गोविंद, डा. विजेता व डा. पूनम भी उपस्थित रहे। मंच संचालन पारुल व लक्ष्मी ने

किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश्वर